कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जीपी सिंह ने रविवार को मतगणना केंद्रों का दौरा कर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के इंतजामों की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न होनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान डीजी ने मतगणना केंद्रों पर तैनात सुरक्षा बलों की स्थिति, प्रवेश और निकास बिंदुओं की व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी प्रणाली तथा संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या गड़बड़ी की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर चुनाव अधिकारियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी एजेंसियां आपसी तालमेल के साथ काम करें ताकि मतगणना के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
सीआरपीएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि मतगणना से एक दिन पहले डीजी ने केंद्रों का दौरा कर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय को और मजबूत किया।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान संपन्न हुआ था। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोट डाले गए। अब 4 मई को मतगणना की जाएगी, जिसके बाद चुनाव परिणाम घोषित होंगे।
हालांकि, एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारतीय चुनाव आयोग ने फाल्टा विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया है। आयोग ने यह फैसला 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई पोलिंग बूथों पर चुनावी नियमों के गंभीर उल्लंघन की शिकायतों के बाद लिया।
आयोग के अनुसार, फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों (सहायक बूथों सहित) पर पुनर्मतदान कराया जाएगा। यह मतदान 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। इसके बाद इस सीट की मतगणना 24 मई को की जाएगी।
चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मतगणना से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर की गई यह सख्ती इस बात का संकेत है कि प्रशासन शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
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