Ayodhya Ram Mandir Donation Case: SIT जांच तेज, गरमाया राजनीतिक माहौल
खबर सार :-
राम मंदिर के लिए दान में मिले फंड के कथित गबन और चोरी की जांच एक SIT कर रही है। रविवार को SIT ने दान का हिसाब-किताब संभालने वाले 11 लोगों से पूछताछ की, जिनमें चंपत राय के पूर्व ड्राइवर भी शामिल थे। खबरों के मुताबिक, SIT अब बैंक कर्मचारियों और मंदिर के पुजारियों से भी पूछताछ कर सकती है।
खबर विस्तार : -
अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं तथा धन के दुरुपयोग के आरोपों की जांच अब तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की पड़ताल के लिए अयोध्या पहुंच चुका है। इस बीच प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने भी जांच की दिशा तय करने के लिए महत्वपूर्ण बैठकें की हैं।
दस्तावेजों की जांच शुरू
सूत्रों के अनुसार, SIT टीम ने अयोध्या पहुंचकर प्रारंभिक स्तर पर संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और अन्य उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन शुरू कर दिया है। इस दौरान अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और जिला मजिस्ट्रेट ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर जांच की प्रगति और आगामी कार्रवाई पर चर्चा की। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संतों ने दी प्रतिक्रिया
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संत महाराज भक्तचरण दास ने कहा कि श्रीराम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला फिलहाल जांच के अधीन है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इस मामले को गंभीरता से लेते हुए SIT का गठन किया है। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है या धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो सरकार कठोर कार्रवाई करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें भी मंदिर में भगवान श्रीराम को चढ़ाए गए चढ़ावे से जुड़ी कुछ जानकारियां प्राप्त हुई हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में एक ईमानदार और सतर्क सरकार कार्य कर रही है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तत्काल SIT जांच के आदेश दिए जाना इस बात का संकेत है कि सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, सनातन संस्कृति और भारतीय विरासत का प्रतीक है। ऐसे में इस विषय पर अफवाहों की बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
कांग्रेस ने साधा योगी सरकार पर निशाना
राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि सरकार अपना दायित्व निभा रही है और जांच समिति स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हर समस्या का समाधान निकाला जाएगा और जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने SIT के गठन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि योगी सरकार अब तक कई मामलों में 89 से अधिक SIT गठित कर चुकी है, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि उनमें से कितने मामलों में दोषियों को सजा मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार SIT जांच का उपयोग सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने के लिए भी किया जाता है। राजपूत ने मांग की कि इस मामले में जांच पूरी तरह पारदर्शी हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि लोगों के बीच किसी प्रकार का संदेह न रहे।
जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर SIT जांच पर टिकी हुई है। जांच एजेंसियां दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, श्रद्धालुओं और आम जनता को जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अफवाहों से बचने और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।
यह भी पढ़ेंः-राम मंदिर दान-पात्र विवाद की जांच के लिए एसआईटी गठित, 15 दिन में सौंपेगी अंतिम रिपोर्ट
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