Rail Network को मिली नई रफ्तार: Gujarat-Maharashtra में 665 करोड़ की परियोजनाओं से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

खबर सार :-
गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में स्वीकृत नई रेल एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान को मजबूती देंगी। आदिपुर-भुज दोहरीकरण, सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन और इंदौर आरओबी न केवल रेल क्षमता बढ़ाएंगे बल्कि माल परिवहन, यात्री सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स दक्षता में भी बड़ा सुधार लाएंगे। इससे क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
Rail Network को मिली नई रफ्तार: Gujarat-Maharashtra में 665 करोड़ की परियोजनाओं से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
खबर विस्तार : -

Indian Railways Project:  भारतीय रेलवे ने देश में रेल क्षमता विस्तार और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए गुजरात और महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में आदिपुर-भुज रेलखंड के दोहरीकरण के लिए 493 करोड़ रुपये तथा महाराष्ट्र में सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन परियोजना के लिए 172 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित शास्त्रीय ब्रिज के पुनर्निर्माण को भी मंजूरी मिली है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बढ़ते रेल यातायात को संभालना, माल परिवहन को गति देना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

कच्छ क्षेत्र में बढ़ेगी रेल क्षमता

आधिकारिक बयान के अनुसार गुजरात में आदिपुर-भुज सेक्शन पर 49 किलोमीटर लंबी दोहरी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। वर्तमान में यह मार्ग गांधीधाम-नालिया कॉरिडोर का सिंगल लाइन रेलखंड है, जिस पर बढ़ते यातायात का दबाव लगातार महसूस किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर दोनों दिशाओं में प्रतिदिन दो अतिरिक्त यात्री ट्रेनें संचालित की जा सकेंगी। रेलवे का अनुमान है कि इस दोहरीकरण से हर वर्ष करीब 1.2 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। इससे कच्छ क्षेत्र के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला

रेल मंत्रालय के अनुसार कच्छ क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इनमें भुज-नालिया गेज परिवर्तन, नालिया-वायोर रेल लाइन विस्तार, नालिया-जखाऊ, वायोर-लखपत तथा देशलपर-लूना के बीच नई रेल लाइनों का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र में यात्री और माल यातायात दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसी संभावित मांग को देखते हुए आदिपुर-भुज रेलखंड का दोहरीकरण स्वीकृत किया गया है, ताकि भविष्य में परिचालन संबंधी बाधाएं न आएं और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु रूप से हो सके।

पनवेल जंक्शन पर कम होगी भीड़

महाराष्ट्र में स्वीकृत सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन परियोजना रेलवे नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। 172 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह 3.7 किलोमीटर लंबी लाइन करजात मार्ग के चिखली और रोहा मार्ग के सोमटणे को सीधे जोड़ेगी। वर्तमान में करजात और रोहा मार्गों के बीच सीधा रेल संपर्क नहीं होने के कारण ट्रेनों को पनवेल जंक्शन से होकर गुजरना पड़ता है। इससे जंक्शन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है और संचालन प्रभावित होता है। नई कॉर्ड लाइन बनने के बाद ट्रेनों को पनवेल में प्रवेश करने या इंजन बदलने की आवश्यकता नहीं होगी।

माल परिवहन में होगा बड़ा सुधार

पनवेल मुंबई महानगर क्षेत्र का सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शन माना जाता है, जहां रोहा, जेएनपीटी, करजात और दीवा जैसी चार प्रमुख दिशाओं से रेल यातायात संचालित होता है। नई कॉर्ड लाइन शुरू होने के बाद करजात और रोहा कॉरिडोर के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा। रेलवे के अनुसार इस परियोजना से हर वर्ष लगभग 90 लाख टन अतिरिक्त माल यातायात संभालने की क्षमता विकसित होगी। साथ ही प्रत्येक मालगाड़ी का लगभग 110 मिनट समय बचेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और माल परिवहन अधिक तेज एवं प्रभावी बनेगा।

जेएनपीए (JNPA) को मिलेगा सीधा लाभ

यह परियोजना विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (जेएनपीए) से जुड़े माल परिवहन के लिए अहम मानी जा रही है। देश के करीब 60 प्रतिशत कंटेनर यातायात को संभालने वाले इस बंदरगाह तक मालगाड़ियों की पहुंच और अधिक सुगम हो जाएगी। वर्तमान में करजात, जसई और रोहा मार्गों के बीच चलने वाली मालगाड़ियों को पनवेल जंक्शन पर इंजन बदलना पड़ता है। नई कॉर्ड लाइन शुरू होने के बाद मालगाड़ियां सीधे पनवेल को बायपास कर सकेंगी, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।

इंदौर में बनेगा नया आरओबी (ROB)

भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश के इंदौर यार्ड में स्थित शास्त्रीय ब्रिज के पुनर्निर्माण को भी मंजूरी दी है। 139 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह रोड ओवर ब्रिज शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रेलवे के अनुसार यह परियोजना सड़क और रेल यातायात दोनों की सुरक्षा तथा सुगमता को बढ़ाएगी।

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