Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक संकट गहराता जा रहा है। भारत के अंदर भी, इस स्थिति को लेकर जनता के बीच घबराहट फैल रही है। हालांकि, सरकार ने लोगों को परेशान न होने और स्थिति नियंत्रण में होने की बात कह रही है। इस सबके के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम को मिडिल ईस्ट संकट पर मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे। PM मोदी शाम 6:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए मुख्यमंत्रियों से बातचीत (PM Modi All CM Meeting) करेंगे।
पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, उसके परिणामस्वरूप देश के भीतर पैदा हुई परिस्थितियों और उनसे निपटने के लिए की जा रही तैयारियों को लेकर चर्चा और समीक्षा करने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 'टीम इंडिया' की भावना के साथ मिलकर काम करने के प्रयासों में तालमेल बिठाना है। हालांकि चुनावी राज्य वाले मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वहां 'आचार संहिता' लागू है।
दरअसल मिडिल ईस्ट के संकट को देखते हुए, PM मोदी लगातार सक्रिय रहे हैं और पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों को भी संबोधित किया। इतना ही नहीं इससे पहले बुधवार शाम को मोदी सरकार ने नई दिल्ली में संसद भवन परिसर के अंदर पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करने के लिए एक 'सर्वदलीय बैठक' बुलाई थी।
पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति इस समय बेहद चिंताजनक है और यह संकट अब तीन हफ़्तों से ज़्यादा समय से बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया है जो इस संकट से जूझ रही है। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ दुनिया भर के लोगों के जीवन पर भी असर डाल रही है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए, इस संघर्ष ने तीन अलग-अलग स्तरों पर अभूतपूर्व चुनौतियां खड़ी की हैं: आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय। भारत की कच्चे तेल और गैस की ज़रूरतों के अलावा, लगभग 1 करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा और हिफ़ाज़त भारत सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
पीएम मोदी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों से गुज़रना अब और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। नतीजतन, भारत का वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में रुकावट का खतरा बना हुआ है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का सुरक्षित रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है।
जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और इसके वैश्विक परिणाम ज़्यादा साफ होते जा रहे हैं, यह बैठक PM मोदी के लिए एक अहम मंच का काम कर करती है। इस मंच के ज़रिए, PM मोदी मुख्यमंत्रियों को मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी देंगे और इस संकट से निपटने के भारत के दृष्टिकोण पर एक व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। पीएम ने शांति और संवाद को ही एकमात्र रास्ता बताया। संकट के समाधान के लिए पीएम मोदी इजरायल, ईरान, अमेरिका और अन्य खाड़ी देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं।
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