बांद्रा: मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसक झड़प के मामले में पुलिस ने अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अधिकारियों पर पथराव और सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने की घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। मामले की जांच अब और तेज कर दी गई है तथा सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर बाकी आरोपियों की पहचान की जा रही है।
यह घटना 20 मई को बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन के पास स्थित गरीब नगर इलाके में हुई, जहां प्रशासन कोर्ट के आदेशों के तहत अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई कर रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान पहले से तय शेड्यूल के अनुसार चलाया जा रहा था और इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। मौके पर मुंबई पुलिस, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ), होम गार्ड और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों की तैनाती की गई थी ताकि कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की जा सके।
एफआईआर के अनुसार, जैसे ही तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू हुई, इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे। देखते ही देखते करीब 100 से 150 लोगों की भीड़ मौके पर इकट्ठा हो गई और कार्रवाई का विरोध करने लगी। पुलिस अधिकारियों ने कई बार लाउडस्पीकर और सार्वजनिक घोषणाओं के जरिए लोगों से शांतिपूर्वक हटने और सरकारी कार्य में बाधा न डालने की अपील की। हालांकि, पुलिस का कहना है कि भीड़ लगातार उग्र होती गई और स्थिति तनावपूर्ण बन गई।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और लोगों को प्रशासनिक कार्रवाई रोकने के लिए उकसाया। इसके बाद अचानक पुलिस और सरकारी कर्मचारियों पर पत्थर तथा अन्य वस्तुएं फेंकी जाने लगीं। इस हमले में कई पुलिसकर्मी और सुरक्षा कर्मचारी घायल हो गए। पुलिस का दावा है कि पथराव पहले से योजना बनाकर किया गया था और कुछ लोगों ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और कई लोगों को हिरासत में लिया। बाद में मामले में 16 आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई। एफआईआर में 10 नामजद आरोपियों का उल्लेख किया गया है, जबकि 100 से 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, दंगा करने, सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोकने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी अधिकारियों पर हमला करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। स्थानीय पुलिस लगातार इलाके में गश्त कर रही है और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच टीम आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया क्लिप और मौके पर मौजूद अधिकारियों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन सबूतों से हिंसा भड़काने वाले मुख्य लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
इस घटना ने एक बार फिर मुंबई में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेशों का पालन करना जरूरी है, जबकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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