शेयर बाजार में तेजी की बहार, सेंसेक्स 412 अंक उछला; निफ्टी 0.58% चढ़ा, डॉलर के मुकाबले रुपया भी चमका
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को तेजी रही। सेंसेक्स 412 अंक उछला, जबकि निफ्टी में 0.58% की बढ़त दर्ज हुई। कच्चे तेल में नरमी और रुपये की मजबूती से समर्थन मिला, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता और एफआईआई की बिकवाली पर नजर रहेगी।
खबर विस्तार : -
Stock Market News: सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बढ़त के साथ शुरुआत की। आज शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में रहे। दिन के दौरान सेंसेक्स 411.92 अंक चढ़कर 72,884.25 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा, जबकि निफ्टी 50 ने 22,651.10 का स्तर छुआ। इस बीच भारतीय रुपये में भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97 पैसे की मजबूती दर्ज की गई। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की संभावित बिकवाली को लेकर बाजार में सतर्कता बनी हुई है।
सेंसेक्स 72,771 और निफ्टी 22,593 पर खुला
बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 72,472.33 के मुकाबले 298.99 अंक यानी 0.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,771.32 पर खुला। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर 22,520.45 से 72.75 अंक यानी 0.32 प्रतिशत ऊपर 22,593.20 पर खुला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 411.92 अंक यानी 0.56 प्रतिशत की तेजी के साथ 72,884.25 का उच्चतम स्तर छुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 50 में 130.65 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,651.10 तक पहुंचा। इन स्तरों से बाजार में खरीदारी की सक्रियता का संकेत मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी
व्यापक बाजार में प्रमुख सूचकांकों की तुलना में छोटे शेयरों का प्रदर्शन बेहतर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब 1.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.40 प्रतिशत से अधिक चढ़ा। सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी ऑटो, मेटल्स, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और फार्मा सूचकांकों में बढ़त रही। इसके विपरीत एफएमसीजी, आईटी और पीएसयू बैंक सूचकांकों में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में तेजी के बावजूद सभी क्षेत्रों में खरीदारी एक जैसी नहीं रही।
डॉलर के मुकाबले रुपया 97 पैसे मजबूत
शेयर बाजार की तेजी के बीच भारतीय मुद्रा को भी मजबूती मिली। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97 पैसे मजबूत होकर 95.76 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मुद्रा बाजार में यह सुधार निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत रहा, हालांकि आगे रुपये की चाल पर वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों का असर बना रह सकता है।
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कच्चे तेल में नरमी, लेकिन वैश्विक चुनौतियां बरकरार
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले संकेत मिले-जुले रहे। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया के कोस्पी और कोस्डैक सूचकांकों में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार पिछले सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुआ था। शुक्रवार को अमेरिका के तीनों प्रमुख शेयर सूचकांकों में तेजी आई थी। वहीं दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। रूस और अन्य पक्षों के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने संबंधी समझौते के बाद आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ कम होने से तेल की कीमतों पर दबाव पड़ा। हालांकि, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं अब भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय हैं।
एफआईआई की बिकवाली पर बाजार की नजर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निकट अवधि में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बिकवाली जारी रख सकते हैं। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2027 में 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान और कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार की उम्मीद घरेलू बाजार के मजबूत बुनियादी कारकों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक उचित मूल्यांकन वाले ग्रोथ शेयरों पर ध्यान दे सकते हैं। हालांकि, किसी भी निवेश निर्णय में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, जोखिम और निवेश अवधि का आकलन जरूरी है।
निफ्टी के लिए 22,295 का स्तर अहम
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में आगे की दिशा तय करने में निफ्टी के महत्वपूर्ण स्तरों की भूमिका रहेगी। तेजी की स्थिति में 22,800 से 23,200 का दायरा संभावित लक्ष्य क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, 22,575 के ऊपर बंद होने में विफलता बाजार पर दबाव बढ़ने का संकेत दे सकती है। दिन के कारोबार में 22,295 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना गया है। कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार को घरेलू आर्थिक संभावनाओं और कच्चे तेल की नरमी से समर्थन मिल रहा है, लेकिन आगे की चाल अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक बाजारों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।
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