Gold Silver Price Today: आसामन पर चल रहे सोने-चांदी की किमतों में हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली। सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट से शादी वाले परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे आ गई हैं। इज़राइल-ईरान तनाव के बावजूद, प्रॉफिट-बुकिंग ने सोने को 1.54 लाख और चांदी को 2.35 लाख के करीब पहुंचा दिया है। US महंगाई के आंकड़ों में पॉजिटिव डेवलपमेंट के बीच डॉलर के मजबूत होने से सोने और चांदी समेत कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट देखी गई।
बता दें कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 0.50 प्रतिशत से ज़्यादा गिरकर 1,54,125 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो दिन का सबसे निचला लेवल है। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 2,35,208 प्रति किलोग्राम पर आ गई। हालांकि, यह खबर लिखे जाने तक सोना 1,55,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर और चांदी 1.39 प्रतिशत या 3,403 की गिरावट के साथ 2,40,957 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी। एनालिस्ट्स के मुताबिक, सोने को 1,54,000 और 1,53,150 पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि रेजिस्टेंस 1,56,800 और 1,58,200 पर है। चांदी को 2,38,800 और 2,32,000 पर सपोर्ट मिल सकता है।
गौरतलब है कि दो दिन में सोना 10,335 महंगा हुआ है। इससे पहले सोने का भाव 23 जनवरी को 1,54,310 रुपए/10g था। वहीं एक किलो चांदी आज 17,257 रुपए बढ़कर 3,61,821 रुपए किलो पर ओपन हुई। कीमतों में बढ़ोतरी की इस "सुनामी" के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। बाजार विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से इसके लिए तीन अंतरराष्ट्रीय कारकों को जिम्मेदार ठहराया है।
भारत में सोने की कीमत सिर्फ ग्लोबल रेट पर ही नहीं, बल्कि डॉलर-रुपये के एक्सचेंज रेट पर भी निर्भर करती है। आज रुपया डॉलर के मुकाबले 91.10 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। LKP सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी के अनुसार, रुपये की कमज़ोरी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदे गए सोने की लैंडिंग कॉस्ट भारत में बहुत महंगी हो गई है, जिससे घरेलू बाज़ार में कीमतें 1.5 लाख के पार चली गई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड को हासिल करने पर ज़ोर और इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों के खिलाफ टैरिफ की धमकी ने ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता पैदा कर दी है। जब भी दुनिया में ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ता है, तो निवेशक शेयर बाज़ार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश यानी सोने की तरफ जाते हैं। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (जैसे भारत का RBI) अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा के अनुसार, 2025 में रिकॉर्ड खरीदारी के बाद, 2026 की शुरुआत में भी सेंट्रल बैंकों की मांग मज़बूत बनी हुई है, जिससे कम सप्लाई और ज़्यादा मांग के कारण कीमतें बढ़ रही हैं।
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