NASA Artemis 2 Mission: नासा का ऐतिहासिक आर्टेमिस 2 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह अंतरिक्ष की गहराई से खोज में मानवता की वापसी की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। इस मिशन में शामिल चारों अंतरिक्ष यात्री ऐतिहासिक 10 दिनों की चंद्रमा यात्रा के बाद पृथ्वी पर सुरक्षित वापस आ गए हैं। उनका कैप्सूल यानी इंटीग्रिटी ने प्रशांत महासागर में दक्षिणी कैलिफोर्निया तट के पास समंदर में सफलतापूर्वक लैंडिंग की। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल थे।
बता दें कि 50 साल में पहली बार इंसानों ने चांद के पास यात्रा की है। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने कुल 1.116 लाख किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी तय की। यह मिशन NASA के बड़े प्लान का हिस्सा है, जिसमें भविष्य में चांद पर इंसानों को उतारना और फिर मंगल गृह पर जाना शामिल है। NASA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी, आपका स्वागत है ! आर्टेमिस 2 अंतरिक्ष यात्री रात 8:07 बजे (ET) समुद्र में सुरक्षित उतरे, जिससे उनकी ऐतिहासिक 10-दिन की चांद की यात्रा खत्म हो गई।"
इससे पहले, एक और पोस्ट में, एजेंसी ने स्पेसक्राफ्ट के उतरने की प्रक्रिया पर रोशनी डालते हुए कहा, "ओरियन का मुख्य पैराशूट खुल गया है। स्पेसक्राफ्ट में 11 पैराशूट का एक सिस्टम है जो इसे लगभग 300 mph की स्पीड से 20 mph तक धीमा कर देगा, जिससे यह धरती पर सुरक्षित उतर सकेगा।" धरती पर लौटने से पहले, NASA ने बताया कि क्रू लगभग 690,000 मील का सफ़र पूरा करके धरती के पास आ रहा था।

इस मिशन के दौरान क्रू ने धरती से 248,655 मील का सफर तय करके एक नया दूरी का रिकॉर्ड बनाया और आखिर में अपने सबसे दूर के बिंदु पर लगभग 252,756 मील की दूरी तक पहुंचे। इस तरह उन्होंने अपोलो 13 मिशन का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह मिशन दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह पांच दशकों से ज़्यादा समय में पहली बार है जब इंसान लो अर्थ ऑर्बिट से आगे डीप स्पेस में गए हैं। NASA के अनुसार, यह यात्रा में अंतरिक्ष यात्री की अब तक की सबसे लंबी यात्रा थी, जिससे भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए रास्ता तैयार करेगी।
यह मिशन सिर्फ एक सफर नहीं था। इसमें इंसानी इतिहास, अलग-अलग तरह के लोग और भविष्य की खोज शामिल थी। पहली बार, इतने सारे बैकग्राउंड के लोगों ने एक साथ सफ़र किया। सफल स्प्लैशडाउन ने साबित कर दिया कि ओरियन कैप्सूल का हीट शील्ड काम कर रहा था। री-एंट्री की मुश्किलें हल की जा रही हैं। यह कामयाबी दिखाती है कि साइंस और इंजीनियरिंग कितनी ताकतवर हो सकती हैं।
आर्टेमिस 2 के सफल होने के साथ, इंसानियत एक बार फिर चांद की तरफ़ बढ़ रही है। यह तो बस शुरुआत है। आने वाले सालों में, चांद पर बस्तियां बसाई जाएंगी और मंगल ग्रह की यात्रा और करीब आ जाएगी। यह मिशन युवाओं को साइंस, इंजीनियरिंग और स्पेस एक्सप्लोरेशन करने के लिए प्रेरित करेगा। धरती से इतनी दूर सफ़र करके सुरक्षित वापस आना इंसानी समझ और टेक्नोलॉजी की जीत है।
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