TRAI  Report: भारत में इंटरनेट यूजर्स का आंकड़ा 1.09 अरब के पार, डिजिटल इंडिया को मिला बड़ा बूस्ट

खबर सार :-

TRAI की ताजा रिपोर्ट भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश करती है। इंटरनेट, ब्रॉडबैंड और टेलीफोन ग्राहकों में लगातार वृद्धि यह दर्शाती है कि डिजिटल कनेक्टिविटी अब देश के विकास का प्रमुख आधार बन चुकी है। बढ़ती टेली-डेंसिटी, बेहतर ARPU और मजबूत दूरसंचार ढांचा आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक डिजिटल शक्ति बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
TRAI  Report: भारत में इंटरनेट यूजर्स का आंकड़ा 1.09 अरब के पार, डिजिटल इंडिया को मिला बड़ा बूस्ट

खबर विस्तार : -

TRAI  Report March 2026: भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या ने एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए मार्च 2026 तक 1.09 अरब (109 करोड़) का आंकड़ा पार कर लिया है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 की तुलना में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या में 6.24 प्रतिशत की तिमाही वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पहले दिसंबर 2025 में कुल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 1.02 अरब थी।

ट्राई की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट सेवाओं के विस्तार, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है।

वायरलेस इंटरनेट का दबदबा, 104 करोड़ यूजर्स इससे जुड़े

TRAI की रिपोर्ट के अनुसार कुल 1.09 अरब इंटरनेट सब्सक्राइबर्स में से लगभग 1.04 अरब उपयोगकर्ता वायरलेस इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं करीब 4.6 करोड़ लोग वायरलाइन यानी तार आधारित इंटरनेट सेवाओं से जुड़े हुए हैं। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि मोबाइल इंटरनेट आज भी देश में इंटरनेट पहुंच का सबसे बड़ा माध्यम बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक स्मार्टफोन और मोबाइल डेटा की उपलब्धता ने इंटरनेट उपयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

ब्रॉडबैंड ग्राहकों में मजबूत बढ़ोतरी

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में 1.06 अरब ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स शामिल हैं, जबकि 2.6 करोड़ लोग नैरोबैंड सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। मार्च 2026 तक ब्रॉडबैंड ग्राहक आधार में 5.81 प्रतिशत की तिमाही वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर, नैरोबैंड सब्सक्रिप्शन में 26.62 प्रतिशत का उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरत और सस्ती डेटा योजनाओं ने इस वृद्धि को गति दी है।

टेली-डेंसिटी में सुधार, 1.33 अरब पहुंची फोन ग्राहकों की संख्या

देश में दूरसंचार सेवाओं का विस्तार भी तेजी से जारी है। मार्च 2026 तक कुल टेलीफोन सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर 1.33 अरब हो गई। इसके साथ ही देश की कुल टेली-डेंसिटी 91.74 प्रतिशत से बढ़कर 93.26 प्रतिशत हो गई है। टेली-डेंसिटी किसी क्षेत्र में प्रति 100 लोगों पर टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या को दर्शाती है। इसमें वृद्धि यह बताती है कि देश के अधिक से अधिक नागरिक संचार सेवाओं से जुड़ रहे हैं। वायरलाइन टेली-डेंसिटी भी दिसंबर 2025 के 3.33 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 में 3.38 प्रतिशत हो गई। इस क्षेत्र में 1.64 प्रतिशत की तिमाही वृद्धि दर्ज की गई।

टेलीकॉम कंपनियों की आय में भी बढ़ोतरी

TRAI की रिपोर्ट के अनुसार वायरलेस सेवाओं के लिए प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) में भी सुधार देखने को मिला है। मार्च 2026 तिमाही में यह बढ़कर 196.04 रुपये हो गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में 0.76 प्रतिशत अधिक है। सालाना आधार पर मासिक ARPU में 7.15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि दूरसंचार कंपनियां प्रति ग्राहक अधिक राजस्व अर्जित करने में सफल रही हैं।

लाइसेंस फीस से बढ़ा सरकार का राजस्व

देश में मोबाइल उपभोक्ताओं द्वारा कॉलिंग उपयोग में भी बढ़ोतरी देखी गई है। मार्च 2026 में प्रति उपयोगकर्ता औसत प्रीपेड कॉलिंग मिनट्स 1017 तक पहुंच गए, जबकि दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 1012 मिनट था। हालांकि वृद्धि दर 0.43 प्रतिशत रही, लेकिन यह दर्शाता है कि इंटरनेट आधारित संचार के बढ़ने के बावजूद वॉयस कॉलिंग की उपयोगिता बनी हुई है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि दूरसंचार क्षेत्र की मजबूती का असर सरकारी राजस्व पर भी दिखाई दिया। दिसंबर 2025 तिमाही में लाइसेंस फीस से 6,733 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जो मार्च 2026 तिमाही में बढ़कर 6,936 करोड़ रुपये हो गए। लाइसेंस फीस में तिमाही आधार पर 3.02 प्रतिशत और सालाना आधार पर 9.41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह दूरसंचार क्षेत्र की लगातार बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का संकेत है।

सैटेलाइट टीवी चैनलों की संख्या भी मजबूत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 917 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अपलिंकिंग, डाउनलिंकिंग या दोनों के लिए मंजूरी दी गई है। इनमें से 908 चैनल भारत में डाउनलिंकिंग के लिए स्वीकृत हैं। मार्च 2026 के अंत तक 342 सैटेलाइट पे टीवी चैनल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे थे। इससे स्पष्ट है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद टीवी प्रसारण उद्योग अभी भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है।

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