भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में उतरे किसान, पंजाब के 21 जिलों में प्रदर्शन, फूंके पुतले

खबर सार :-

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा। पंजाब के 21 जिलों में किसानों ने उग्र प्रदर्शन कर केंद्र सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले फूंके और नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि इस डील से देशभर के किसानों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में उतरे किसान, पंजाब के 21 जिलों में प्रदर्शन, फूंके पुतले

खबर विस्तार : -

चंडीगढ़: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में बुधवार को किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया। किसान संगठनों ने पंजाब के 21 जिलों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ रोष मार्च निकाले। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले भी फूंके।

अमृतसर में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर की अगुवाई में सैकड़ों किसान भाजपा कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि इस समझौते को जुलाई के अंत तक लागू करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन इस संबंध में किसानों, खेत मजदूरों और अन्य संबंधित वर्गों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया।

कृषि और डेयरी क्षेत्र पर बढ़ेगा दबाव 

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि यदि यह ट्रेड डील लागू होती है तो पंजाब सहित पूरे देश के किसानों, खेत मजदूरों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना है कि विदेशी उत्पादों के लिए बाजार खोलने से स्थानीय कृषि और डेयरी क्षेत्र पर दबाव बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।

कई जिलों में प्रदर्शन

किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान पर अमृतसर, बठिंडा, फरीदकोट, फिरोजपुर, फाजिल्का, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब, पठानकोट, पटियाला, रूपनगर, मोहाली, संगरूर, शहीद भगत सिंह नगर और तरनतारन में प्रदर्शन किए गए। कई स्थानों पर भाजपा कार्यालयों और भाजपा नेताओं के घरों के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया गया।

केंद्र सरकार को चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों और कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।

 

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