Pilibhit news: जिला उपाध्यक्ष की गिरफ्तारी के खिलाफ उतरी सपा, नेता बोले- सत्ता के इशारे पर हो रहा है दमन

खबर सार :-
पीलीभीत में समाजवादी पार्टी ने जिला उपाध्यक्ष मखदूम खान की गिरफ्तारी का विरोध किया। कार्यकर्ताओं ने सपा ऑफिस से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी के दबाव में की गई है।

Pilibhit news: जिला उपाध्यक्ष की गिरफ्तारी के खिलाफ उतरी सपा, नेता बोले- सत्ता के इशारे पर हो रहा है दमन
खबर विस्तार : -

पीलीभीत: समाजवादी पार्टी ने जिले में जिला उपाध्यक्ष मखदूम खान की गिरफ्तारी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है। गुरुवार को सपा नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतर आए।

सपा ऑफिस से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च

गुरुवार दोपहर बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जिला ऑफिस पर इकट्ठा हुए। वहां से जिला अध्यक्ष जगदेव सिंह 'जग्गा' के नेतृत्व में नेताओं ने पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। कलेक्ट्रेट पहुंचकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) को ज्ञापन सौंपा, जिसमें जिला उपाध्यक्ष की "गैरकानूनी" गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।

सरकार के दबाव में गिरफ्तारी का आरोप

ज्ञापन सौंपते समय जिला अध्यक्ष जगदेव सिंह 'जग्गा' ने कड़े शब्दों में कहा कि जिले के एक राज्य मंत्री के इशारे पर जिला प्रशासन और पुलिस लगातार समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा, "जिस तरह से 18 फरवरी की रात को मखदूम खान को उठाया गया और उन पर इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023 की धाराएं लगाई गईं, वह पूरी तरह से सत्ताधारी पार्टी की दबाने वाली पॉलिसी का हिस्सा है। एडमिनिस्ट्रेशन ने यह कार्रवाई माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करते हुए की है।"

इंसाफ की लड़ाई हाई कोर्ट तक जाएगी

सीनियर एडवोकेट और SP लीडर सुधीर तिवारी ने अपनी लीगल पोजीशन रखते हुए एडमिनिस्ट्रेशन पर हमला बोला। उन्होंने साफ किया कि IPC की धारा 170 के तहत उन्हें जेल भेजने का पुलिस का लीगल तरीका कानूनी तौर पर गलत है, क्योंकि इस धारा का जिक्र ओरिजिनल FIR में भी नहीं था। तिवारी ने कहा, "अगर हमें सपा जिला उपाध्यक्ष का सपोर्ट मिला, तो हम इस नाइंसाफी के खिलाफ हाई कोर्ट तक लड़ेंगे।"

खास बातें और मांगें:

गैर-कानूनी गिरफ्तारियां: सपा का आरोप है कि 7 साल से कम सज़ा वाले मामलों में सीधे जेल भेजना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।

एडमिनिस्ट्रेटिव मिलीभगत: आरोप है कि अमरिया तहसील एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस BJP नेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं।

आंदोलन की चेतावनी: अगर जल्द ही निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो सपा कार्यकर्ता 'जेल भरो आंदोलन' शुरू करेंगे।

प्रोटेस्ट के दौरान बड़ी संख्या में सपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, उन्होंने एडमिनिस्ट्रेशन को चेतावनी दी कि वे किसी भी हालत में समाजवादियों पर ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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