पीलीभीतः पीलीभीत जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के नाम पर कथित रूप से धन उगाही का मामला सामने आया है। विकासखंड मरौरी क्षेत्र की ग्राम पंचायत पिपरिया भजा के मजरा घियोना निवासी एक दिव्यांग युवक ने ग्राम सचिव और प्रधान पर आवास दिलाने के बदले 20 हजार रुपये मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। युवक का कहना है कि रुपये न देने पर उसका नाम आवास सूची से काट दिया गया, जबकि वह पूरी तरह पात्र है।
पीड़ित युवक ने बताया कि वह एक पैर से दिव्यांग है और लगभग 80 प्रतिशत दिव्यांग है। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण वह लंबे समय से सरकारी आवास योजना का लाभ पाने की उम्मीद लगाए बैठा था। युवक के अनुसार उसका चयन मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत किया गया था, लेकिन बाद में सचिव और प्रधान ने उससे 20 हजार रुपये की मांग की। जब उसने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो उसका नाम आवास सूची से हटा दिया गया।
युवक का आरोप है कि उसने मामले की शिकायत खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से लिखित रूप में की थी और जांच कर कार्रवाई की मांग भी की थी, लेकिन अब तक न तो कोई जांच हुई और न ही किसी अधिकारी ने उसकी शिकायत पर ध्यान दिया। इससे परेशान होकर वह लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह अपनी समस्या लेकर सचिव के कार्यालय पहुंचा और आवास दिलाने की गुहार लगाई, तब सचिव ने उसकी बात सुनने के बजाय अभद्र व्यवहार किया। युवक का कहना है कि जब उसने रिश्वत देने से इनकार किया तो उसके साथ गाली-गलौज की गई और शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में आवास योजनाओं के नाम पर बड़े स्तर पर वसूली की जा रही है। आरोप है कि सचिव और प्रधान मिलकर पात्र लाभार्थियों से 20 से 30 हजार रुपये तक की मांग कर रहे हैं। जो लोग पैसे देने में सक्षम नहीं हैं, उनके नाम सूची से काट दिए जाते हैं या उन्हें अपात्र घोषित कर दिया जाता है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांग और गरीब लोगों को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद पीलीभीत में एक दिव्यांग युवक को आवास से वंचित किए जाने और रिश्वत मांगने के आरोपों ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित युवक को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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