Anti Narcotics Task Force : हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (Anti Narcotics Task Force) सहारनपुर इकाई ने हरियाणा पुलिस की अपराध अन्वेषण शाखा के सहयोग से अंतरराज्यीय अफीम तस्करी (Opium Smuggling) नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक सक्रिय तस्कर को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान आरोपी के कब्जे से करीब दो किलो 20 ग्राम अवैध अफीम बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 11 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने मौके से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनकी मदद से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
यह कार्रवाई 20 मई 2026 की रात दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रतापगढ़ मोड़ के पास की गई। पुलिस को पहले से सूचना मिली थी कि झारखंड से एक तस्कर बड़ी मात्रा में अफीम लेकर पंजाब और चंडीगढ़ क्षेत्र में सप्लाई करने के लिए आने वाला है। इसी सूचना के आधार पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (Anti Narcotics Task Force) और अपराध अन्वेषण शाखा की संयुक्त टीम ने जाल बिछाया और संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान झारखंड के लातेहार जिले के शिवला गांव निवासी 66 वर्षीय सुलेमान मियां के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी लंबे समय से अवैध अफीम तस्करी (Illegal Opium Trade) से जुड़ा हुआ था। पुलिस के अनुसार झारखंड में आरोपी का बेटा इस धंधे में सक्रिय है और वही अफीम उपलब्ध कराता था। इसके बाद आरोपी पंजाब और चंडीगढ़ समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसकी सप्लाई करता था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके। वह अलग-अलग राज्यों के रास्तों का इस्तेमाल करता था और लगातार मोबाइल नंबर बदलता रहता था। बरामद किए गए मोबाइल फोन से कई अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जांच एजेंसियां कॉल डिटेल और संपर्कों के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (Anti Narcotics Task Force) लंबे समय से मादक पदार्थों के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत सहारनपुर इकाई को सूचना मिली थी कि दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे के रास्ते बड़ी खेप भेजी जाने वाली है। इसके बाद हरियाणा पुलिस की अपराध अन्वेषण शाखा के साथ समन्वय स्थापित किया गया। संयुक्त टीम ने हाईवे पर निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। देर रात पुलिस ने आरोपी को रोककर तलाशी ली तो उसके पास से अफीम बरामद हुई।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हरियाणा के थाना थानेसर सदर में एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरफ्तारी से उत्तर भारत में सक्रिय अफीम तस्करी (Opium Smuggling) गिरोह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि झारखंड से हरियाणा और पंजाब तक फैला यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था। अवैध अफीम तस्करी (Illegal Drug Trafficking) के जरिए मोटा मुनाफा कमाया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और अब तक कितनी खेप विभिन्न राज्यों में पहुंचाई जा चुकी है। कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम की भी सराहना की जा रही है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (Anti Narcotics Task Force) सहारनपुर के प्रभारी नवीन कुमार के नेतृत्व में टीम ने पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। उनके साथ शिवम चौधरी और विकास कुमार भी शामिल रहे। वहीं हरियाणा की अपराध अन्वेषण शाखा से इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार, एएसआई ललित कुमार, मुंशी दिनेश कुमार, सिपाही साहिल कुमार और गोविंद ने भी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Smuggling Network) को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं। पिछले कुछ वर्षों में उत्तर भारत में अफीम और अन्य नशीले पदार्थों की सप्लाई बढ़ने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने और तस्करी की जड़ों तक पहुंचने के लिए आगे भी अभियान जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड और आसपास के कुछ इलाकों से अफीम की अवैध सप्लाई लंबे समय से कई राज्यों तक पहुंचती रही है। हालांकि लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई के कारण तस्करों पर दबाव बढ़ा है। इस मामले में भी जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन, संपर्क सूत्रों और परिवहन के तरीकों की गहराई से जांच कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। मोबाइल डेटा और पूछताछ के आधार पर कई ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी चल रही है। फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश कर रिमांड लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
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