झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और गंगाधर राव के विवाह समारोह का भव्य आयोजन, इतिहास हुआ जीवंत

खबर सार :-
मणिकर्णिका वूमेंस क्लब ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और महाराजा गंगाधर राव के विवाह समारोह के भव्य पुनर्मंचन के माध्यम से इतिहास को जीवंत कर दिया, सुनीता शर्मा इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और गंगाधर राव के विवाह समारोह का भव्य आयोजन, इतिहास हुआ जीवंत
खबर विस्तार : -

झांसी में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की गौरवगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करने के उद्देश्य से मणिकर्णिका वूमेंस क्लब द्वारा भव्य ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन में महाराजा गंगाधर राव और रानी लक्ष्मीबाई के विवाह समारोह का पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक विधानों के साथ मंचन किया गया। कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को इतिहास के स्वर्णिम युग की याद दिला दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद मणिकर्णिका वूमेंस क्लब की प्रेसिडेंट ओमनी राय ने रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभाई, जबकि कविता पांडे ने महाराजा गंगाधर राव का किरदार प्रस्तुत किया। दोनों कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विवाह समारोह में मेहंदी, बारात स्वागत, जयमाला, कन्यादान और अन्य वैवाहिक संस्कार भारतीय परंपरा के अनुरूप संपन्न कराए गए। पारंपरिक संगीत, सांस्कृतिक उल्लास और ऐतिहासिक भावनाओं से पूरा वातावरण भक्तिमय और गौरवमयी दिखाई दिया। आयोजकों ने इसे झांसी में पहली बार आयोजित ऐसा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बताया, जिसका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि युवाओं को इतिहास और भारतीय संस्कृति से जोड़ना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुनीता शर्मा उपस्थित रहीं। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में रविका खरे एवं ईशा अरोरा ने सहभागिता निभाई। उपस्थित लोगों ने आयोजन को झांसी की सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक अस्मिता का अद्भुत उदाहरण बताया।

मणिकर्णिका वूमेंस क्लब की चार्टर प्रेसिडेंट सपना सरावगी, वाइस प्रेसिडेंट नूपुर अग्रवाल, ट्रेजरार तमन्ना राय एवं सेक्रेटरी संयुक्त शर्मा ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन राखी मिश्रा और कविता पांडे द्वारा किया गया। वरिष्ठ सदस्य अंजलि अग्रवाल, दर्शना सोनी सहित क्लब की अन्य सदस्यों ने भी आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि झांसी की ऐतिहासिक पहचान, नारी शक्ति और भारतीय संस्कारों के सम्मान का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया।
 

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