बाला साहेब ठाकरे के सपनों को मिली उड़ानः Slum Free Mumbai Campaign की शुरुआत, हर झुग्गीवासी को मिलेगा 300 स्क्वायर फुट घर

खबर सार :-
महाराष्ट्र सरकार की यह पहल मुंबई के शहरी ढांचे को बदलने की दिशा में बड़ा कदम है। पुनर्विकास, बेहतर आवास और तकनीकी निगरानी के संयोजन से झुग्गी समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकता है। हालांकि, सफल क्रियान्वयन, पारदर्शिता और समयबद्धता इस मिशन की असली परीक्षा होंगे। यदि सही ढंग से लागू हुआ, तो यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

बाला साहेब ठाकरे के सपनों को मिली उड़ानः Slum Free Mumbai Campaign की शुरुआत, हर झुग्गीवासी को मिलेगा 300 स्क्वायर फुट घर
खबर विस्तार : -

Mumbai Slum-Free Campaign: मुंबई को झुग्गी-मुक्त बनाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी और व्यापक अभियान की शुरुआत की है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को “हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे शहरी जन कल्याण अभियान” का ऐलान करते हुए इसे शहर के विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। इस अभियान का उद्देश्य झुग्गी-झोपड़ियों के पुनर्विकास को तेज करना और साथ ही नए अवैध अतिक्रमणों को रोकना है। इसके लिए सरकार ने एडवांस एनईटीआरएम (नेटवर्क फॉर एनक्रोचमेंट ट्रैकिंग एंड रिपोर्टिंग फॉर मुंबई) तकनीक लागू करने की घोषणा की है, जो रियल-टाइम निगरानी और रिपोर्टिंग के जरिए अतिक्रमण पर नियंत्रण रखेगी।

बालासाहेब ठाकरे की विरासत को समर्पित अभियान

उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह पहल बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर शुरू की गई है और उनके झुग्गी-मुक्त मुंबई के सपने को साकार करने की दिशा में एक सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इस मिशन को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करेगी ताकि शहर के लाखों लोगों को बेहतर जीवन मिल सके।

किन क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान के तहत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां 50 एकड़ से अधिक जमीन पर झुग्गियां फैली हुई हैं और कुल क्षेत्रफल का 51 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा स्लम में आता है। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर क्लस्टर आधारित पुनर्विकास किया जाएगा। झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) इस योजना को निजी, सरकारी और अर्ध-सरकारी भूमि पर लागू करेगा। इससे बड़े स्तर पर समेकित विकास संभव हो सकेगा और अनियोजित बस्तियों को व्यवस्थित आवासीय परिसरों में बदला जा सकेगा।

बायोमेट्रिक सत्यापन और सटीक मैपिंग

योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी झुग्गीवासियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक झुग्गी का डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा ताकि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान हो सके और किसी भी तरह की धोखाधड़ी रोकी जा सके। इसके अलावा, योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण और महाप्रीत जैसी एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए जाएंगे।

निवासियों के लिए बड़ा तोहफा: 300 वर्ग फुट के घर

इस अभियान के तहत सबसे बड़ी राहत यह है कि अब पुनर्विकास के बाद मिलने वाले घरों का न्यूनतम आकार बढ़ाकर 300 वर्ग फुट कर दिया गया है। यह फैसला लाखों झुग्गीवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुरानी परियोजनाओं को भी नए मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जाएगा, जिससे पहले से चल रही योजनाओं में भी लाभ मिलेगा।

एनईटीआरएम: टेक्नोलॉजी से सख्ती

नई झुग्गियों के निर्माण को रोकने के लिए एनईटीआरएम प्रणाली एक अहम भूमिका निभाएगी। यह तकनीक शहर के विभिन्न हिस्सों की निगरानी कर अवैध निर्माण की तुरंत पहचान करेगी और संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजेगी। इससे भविष्य में झुग्गियों के विस्तार को रोकने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि तकनीक और नीति के इस संयोजन से मुंबई को योजनाबद्ध और आधुनिक शहर के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

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