मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भारी ट्रैफिक जाम, कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाईं सुप्रिया सुले, शेयर किया वीडियो

खबर सार :-
शुक्रवार को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भीषण जाम लग गया। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले भी इस जाम में फंस गईं और महाराष्ट्र दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकीं।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भारी ट्रैफिक जाम, कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाईं सुप्रिया सुले, शेयर किया वीडियो
खबर विस्तार : -

मुंबई: महाराष्ट्र दिवस की छुट्टी और उसके बाद आए वीकेंड (सप्ताहांत) के कारण, शुक्रवार सुबह से ही मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिला। इस ट्रैफिक जाम का असर न केवल आम यात्रियों पर पड़ा, बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की सांसद सुप्रिया सुले भी इससे प्रभावित हुईं। वह लगभग तीन घंटे तक ट्रैफिक में फंसी रहीं, जिसके चलते वह महाराष्ट्र दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम में समय पर नहीं पहुंच पाईं।

लगातार तीन दिनों की छुट्टी होने के कारण एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई थी। इसी बीच, 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट के उद्घाटन के लिए कुछ जगहों पर लागू किए गए रूट डायवर्जन (रास्ता बदलने के इंतजाम) ने ट्रैफिक की स्थिति को और भी बदतर बना दिया। पुणे की ओर जाने वाले रास्ते पर भारी जाम लग गया, जबकि मुंबई की ओर जाने वाले वाहनों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया ताकि पुणे की दिशा में जा रहे ट्रैफिक को निकलने का मौका मिल सके। इसका नतीजा यह हुआ कि दोनों ही दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सोशल मीडिया पर ट्रैफिक जाम का एक वीडियो साझा करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा, "हम सुबह 7 बजे ठाणे से निकले थे, लेकिन हम दो घंटे से भी ज्यादा समय से ट्रैफिक में फंसे हुए हैं।" वीडियो में अन्य यात्रियों ने भी अपनी शिकायतें और परेशानियां जाहिर कीं। 

ट्रैफिक प्रबंधन पर सवाल

भीषण गर्मी के कारण कई वाहनों के इंजन ओवरहीट हो गए और कुछ कारें तो सड़क के ठीक बीच में ही बंद पड़ गईं। घाट सेक्शन में चढ़ाई के कारण स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो गई। इस पूरी घटना ने यात्रियों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है और अब ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट का उद्घाटन शुक्रवार को किया गया था। कुछ यात्रियों का मानना ​​है कि ट्रैफिक जाम की यह समस्या सीधे तौर पर इसी कार्यक्रम का नतीजा थी। यात्रियों ने यह सुझाव भी दिया कि उद्घाटन समारोह या तो सुबह बहुत जल्दी आयोजित किया जाना चाहिए था, या फिर एक दिन पहले ही कर लिया जाना चाहिए था।


 

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