झांसी: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जिस 'जीरो टॉलरेंस' और त्वरित न्याय की नीति का ढिंढोरा पीटती है, उसे धरातल पर उतारने में बुंदेलखंड के झांसी परिक्षेत्र ने मिसाल कायम कर दी है। जनसुनवाई समन्वय शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) की ताजा रैंकिंग ने यह साफ कर दिया है कि जनसमस्याओं के निस्तारण में झांसी रेंज का कोई सानी नहीं है। फरवरी 2026 की मासिक मूल्यांकन रिपोर्ट में झांसी परिक्षेत्र ने लगातार 11वीं बार उत्तर प्रदेश के सभी परिक्षेत्रों के बीच प्रथम स्थान हासिल कर अपनी बादशाहत कायम रखी है। इस सफलता की चमक केवल रेंज स्तर तक सीमित नहीं है; बल्कि झांसी जनपद ने 11वीं बार और पड़ोसी जनपद जालौन ने लगातार तीसरी बार शीर्ष स्थान प्राप्त कर 'सुशासन' के दावों को आंकड़ों की कसौटी पर सच साबित किया है।
अक्सर सरकारी महकमों में फाइलों का बोझ और तारीखों का खेल आम बात मानी जाती है, लेकिन झांसी परिक्षेत्र की इस उपलब्धि के पीछे एक सधी हुई रणनीति और जवाबदेही का तंत्र नजर आता है। पुलिस महानिरीक्षक (IG) आकाश कुलहरि के कुशल निर्देशन में आईजीआरएस सेल ने जिस तरह से शिकायतों का वर्गीकरण और समयबद्ध निस्तारण किया, उसी का परिणाम है कि आज पूरा प्रदेश इस मॉडल की ओर देख रहा है। फरवरी 2026 के महीने में प्राप्त हुई शिकायतों का विश्लेषण करें, तो पाया गया कि शिकायतों के निस्तारण में न केवल गति (Speed) बल्कि गुणवत्ता (Quality) का भी विशेष ध्यान रखा गया। शासन की मंशा के अनुरूप, पुलिस ने शिकायतों को केवल कागजों पर 'डिस्पोज' नहीं किया, बल्कि शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि को प्राथमिकता दी।
किसी भी प्रशासनिक तंत्र की सफलता की असली इबारत उसकी अंतिम कड़ी में तैनात कर्मचारी ही लिखते हैं। झांसी परिक्षेत्र की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे भी उन 'साइलेंट हीरोज' की दिन-रात की मॉनिटरिंग और समर्पण है, जिन्होंने पोर्टल पर आने वाली हर शिकायत को केवल एक नंबर न मानकर एक व्यक्ति की पीड़ा समझा। पुलिस महानिरीक्षक आकाश कुलहरि ने टीम का उत्साहवर्धन करते हुए इस सफलता का श्रेय अपने मातहतों को दिया है। इसी क्रम में उन्होंने आईजीआरएस और सीसीटीएनएस प्रभारी उप निरीक्षक राजेश सिंह, रेंज कोर्डिनेटर विमल कुमार श्रीवास्तव, मुख्य आरक्षी देवेन्द्र प्रताप सिंह और कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए श्रीमती प्रियंका गुप्ता के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। साथ ही, जनपद जालौन से मुख्य आरक्षी अखिलेश कुमार और जनपद झांसी से महिला आरक्षी कु0 किशोरी को उनके बेमिसाल योगदान के लिए नकद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। महकमे की यह पहल न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाती है, बल्कि विभाग के भीतर एक स्वस्थ कार्य-संस्कृति को भी जन्म देती है, जहां केवल शाबाशी ही नहीं बल्कि वास्तविक सम्मान भी मिलता है।
एक ओर जहां झांसी जनपद ने अपनी 11वीं जीत के साथ रिकॉर्ड की झड़ी लगा दी है, वहीं जालौन का लगातार तीसरी बार प्रथम आना यह दर्शाता है कि यह सफलता कोई 'तुक्का' नहीं बल्कि एक सेट सिस्टम का हिस्सा है। जालौन पुलिस प्रशासन ने भी बीते कुछ महीनों में शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया में भारी बदलाव किए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जब किसी क्षेत्र की पुलिस जनता की बात सुनने लगती है, तो अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलती है। आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों में जमीन विवाद, आपसी रंजिश और घरेलू हिंसा जैसे मामले प्रमुख होते हैं। यदि इनका समय रहते समाधान हो जाए, तो ये बड़ी आपराधिक घटनाओं का रूप नहीं लेते।
परिक्षेत्र के जनपद प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनसुनवाई के दौरान केवल औपचारिकता न निभाई जाए। आईजी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि शिकायतकर्ता की समस्या को 'गंभीरता' से सुनना ही समाधान की पहली सीढ़ी है। शासन की मंशा बहुत साफ है-पीड़ित को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। झांसी रेंज में लागू की गई व्यवस्था के तहत, शिकायतों के निस्तारण के बाद रैंडम फीडबैक लिया जाता है। यदि शिकायतकर्ता असंतुष्ट है, तो संबंधित विवेचक या अधिकारी से जवाब-तलब किया जाता है। यही वह कड़ाई है जिसने झांसी को 11 बार 'नंबर वन' के पायदान पर खड़ा किया है। लगातार 11 बार शीर्ष पर रहने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इस मानक को बनाए रखने की है। जैसे-जैसे पोर्टल पर शिकायतों का बोझ बढ़ता है, वैसे-वैसे निस्तारण की गुणवत्ता बनाए रखना कठिन होता जाता है। हालांकि, झांसी रेंज की तकनीकी टीम और प्रशासनिक समन्वय को देखते हुए यह असंभव नहीं लगता।
बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में, जहां साक्षरता और संसाधनों की अपनी चुनौतियां हैं, वहां डिजिटल माध्यम (IGRS) से न्याय दिलाना एक बड़ी सामाजिक क्रांति की तरह है। अब देखना यह होगा कि क्या यूपी के अन्य परिक्षेत्र झांसी के इस 'वर्किंग मॉडल' से सीख लेकर अपनी रैंकिंग सुधारते हैं या झांसी का यह एकतरफा राज जारी रहेगा।
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