Jhansi News: झांसी मेडिकल कॉलेज में पदों की अदला-बदली का डरावना खेल!

खबर सार :-
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों को उनके तय पद से विपरीत काम देने का चलन जारी है। सूत्रों से पता चला है कि कई जगहों पर स्वीपर को ऑपरेटिंग थिएटर स्टाफ से लेकर वार्ड बॉय तक के काम दिए गए हैं। कुछ वार्ड बॉय तो एम्बुलेंस भी चला रहे हैं।

Jhansi News: झांसी मेडिकल कॉलेज में पदों की अदला-बदली का डरावना खेल!
खबर विस्तार : -

झांसी: महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं में पदों की अदला-बदली का जो खेल सामने आया है, वह गंभीर चिंता का विषय बन गया है। सूत्रों के अनुसार, यहां नियमों और पदों की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों को उनके मूल पदों के विपरीत जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं, जिससे न केवल कर्मचारियों में असंतोष है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

बिना प्रशिक्षण के सौंपे जा रहे कार्य

मेडिकल कॉलेज में कई कर्मचारी अपने निर्धारित पदों से हटाकर अन्य जिम्मेदारियों के लिए लगाए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, कई स्वीपरों को ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और वार्ड बॉय की जिम्मेदारी दी जा रही है। वहीं कुछ वार्ड बॉय एंबुलेंस चलाने की ड्यूटी निभा रहे हैं। यह समस्या केवल एक-दो कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्टाफ में फैल चुकी है। प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक ढीलाई ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है।

कॉलेज प्रशासन द्वारा कर्मचारियों के ड्यूटी चार्ट में उनके पद और जिम्मेदारी का उल्लेख किया जाता है। फिर भी, कई कर्मचारियों को उनके मूल पद से हटाकर ऐसे कार्य सौंपे जा रहे हैं, जिनके लिए वे प्रशिक्षित नहीं हैं। खासकर आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम, गायनिक और टीवी विभाग में स्वीपरों को वार्ड बॉय की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अगर भर्ती मरीज के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने दी जानकारी

इस पूरे मामले पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सचिन माहुर का कहना है कि कर्मचारियों को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है ताकि अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहें। उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यवस्था मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और अव्यवस्था रोकने के लिए बनाई गई है। हालांकि यह बात प्रशासन की सख्ती और योजना की कमी को पूरी तरह नहीं ढक पाती।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पदों की अदला-बदली से न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, बल्कि मरीजों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है। इसे देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन सपष्ट नियम और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे।

अन्य प्रमुख खबरें