झांसी में इबोला के दो संदिग्ध यात्री निगरानी में, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
खबर सार :-
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि इबोला एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जिसकी औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत तक हो सकती है। हालांकि समय रहते पहचान और उपचार से संक्रमण के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
खबर विस्तार : -
झांसी: अफ्रीकी देशों कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में इबोला वायरस संक्रमण के मामलों को देखते हुए भारत सरकार के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सतर्कता बढ़ा दी है। प्रभावित देशों से भारत आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर विशेष जांच की जा रही है। इसी क्रम में झांसी में युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा कर लौटे दो संदिग्ध यात्रियों को स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में रखा गया है।
लक्षण दिखने पर होगी त्वरित कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोनों यात्री हाल ही में प्रभावित देशों से वापस लौटे हैं। एहतियात के तौर पर उन्हें 21 दिनों तक निगरानी में रखा गया है। फिलहाल उनमें इबोला संक्रमण के स्पष्ट लक्षण नहीं पाए गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार उनकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि प्रभावित देशों से लौटे दो यात्रियों की पहचान होने के बाद उन्हें एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत निगरानी सूची में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रतिदिन उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रही है और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमाकांत स्वर्णकार ने बताया कि दोनों यात्रियों से रोजाना टेलीफोन के माध्यम से संपर्क किया जा रहा है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि किसी भी व्यक्ति में इबोला संक्रमण से जुड़े लक्षण विकसित होते हैं तो उसका नमूना लेकर जांच के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजा जाएगा।
दो से 21 दिनों तक दिख सकते हैं लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला संक्रमण के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के दो दिन से लेकर 21 दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, अत्यधिक थकान, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। गंभीर मामलों में नाक, मुंह और मसूड़ों से रक्तस्राव भी हो सकता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी या मल के सीधे संपर्क से फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के कपड़ों, बिस्तर या अन्य उपयोग की वस्तुओं के संपर्क में आने से भी संक्रमण का खतरा रहता है। प्रशासन ने प्रभावित देशों से लौटे यात्रियों से स्वास्थ्य विभाग को सही जानकारी देने और निगरानी प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों को भी सतर्क रहने और संदिग्ध मामलों की तत्काल सूचना देने के निर्देश जारी किए हैं।
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