गोवा में ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ा प्रहार: नेपाल बॉर्डर से गोवा तक फैले अंतर्राज्यीय रैकेट का भंडाफोड़, यूपी का मुख्य सप्लायर गिरफ्तार

खबर सार :-
गोवा क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई ने भारत-नेपाल सीमा से संचालित एक संगठित ड्रग सप्लाई नेटवर्क का खुलासा कर दिया है। मुख्य सप्लायर की गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों को बड़े स्तर पर सक्रिय तस्करी गिरोहों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है। पुलिस अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों, वित्तीय लेन-देन और नशीले पदार्थों के स्रोतों की गहन जांच कर रही है।
गोवा में ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ा प्रहार: नेपाल बॉर्डर से गोवा तक फैले अंतर्राज्यीय रैकेट का भंडाफोड़, यूपी का मुख्य सप्लायर गिरफ्तार
खबर विस्तार : -

Goa Drug Racket: गोवा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने संगठित नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय ड्रग सप्लाई नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से नेटवर्क के कथित मुख्य सप्लायर एकलाक अहमद उर्फ मन्ना मलिक को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि यह नेटवर्क भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गोवा तक सक्रिय था और हेरोइन की सप्लाई संगठित तरीके से की जा रही थी।

मांडवी पुल के नीचे छापेमारी में मिली बड़ी सफलता

क्राइम ब्रांच को विशेष खुफिया सूचना मिली थी कि गोवा के बेतिम जेटी क्षेत्र में नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर मांडवी पुल के नीचे स्थित थोक मछली बाजार क्षेत्र में छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान दो नेपाली नागरिकों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 39.88 ग्राम हेरोइन बरामद की, जिसकी बाजार कीमत करीब 8.88 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अलावा एक स्कूटर और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। इस मामले में एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 21(बी) और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों से खुलते गए नेटवर्क के तार

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अर्जुन बिस्वकर्मा (36) और चेतकंत ओली (25) के रूप में हुई। शुरुआती पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और एक अन्य नेपाली नागरिक नरिशोर भंडारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ये आरोपी नियमित रूप से उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में बैठे एक सप्लायर से संपर्क करते थे और उसी के माध्यम से हेरोइन मंगाई जाती थी।

मोबाइल ऑर्डर और ऑनलाइन पेमेंट से चलता था कारोबार

जांच एजेंसियों के अनुसार पूरा नेटवर्क आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहा था। आरोपी मोबाइल फोन के जरिए सप्लायर को हेरोइन का ऑर्डर देते थे। भुगतान ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजेक्शन के माध्यम से किया जाता था। पैसे मिलने की पुष्टि के बाद सप्लायर गोवा-रूपईडीहा बस सेवा के जरिए पार्सल भेजता था। उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमा पर स्थित रूपईडीहा इस नेटवर्क का महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट बन चुका था। पुलिस का मानना है कि इस मार्ग का इस्तेमाल लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए किया जा रहा था।

बहराइच का मन्ना मलिक निकला नेटवर्क का मास्टरमाइंड

डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुख्य सप्लायर की पहचान बहराइच निवासी एकलाक अहमद उर्फ मन्ना मलिक के रूप में की। इसके बाद गोवा क्राइम ब्रांच ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया। कई दिनों की निगरानी और तकनीकी जांच के बाद मन्ना मलिक को बहराइच से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ पहले से हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, आर्म्स एक्ट और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

भारत-नेपाल सीमा से जुड़े बड़े नेटवर्क की आशंका

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मन्ना मलिक की गिरफ्तारी से केवल एक सप्लाई चैन का खुलासा नहीं हुआ है, बल्कि भारत-नेपाल सीमा के रास्ते संचालित होने वाले बड़े ड्रग नेटवर्क के अहम सुराग भी हाथ लगे हैं। जांच एजेंसियां अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों, ड्रग्स के स्रोत, वितरण तंत्र और वित्तीय लेन-देन की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय ऐसे नेटवर्क युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने के साथ-साथ संगठित अपराध को भी बढ़ावा देते हैं। ऐसे में इस कार्रवाई को ड्रग तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चला अभियान

इस पूरे अभियान का नेतृत्व क्राइम ब्रांच के अधिकारियों महेश गाडेकर, माधव नाइक, कल्पेश तोरास्कर और क्रितेश किनालकर ने किया। कार्रवाई एसपी जीवबा दलवी की निगरानी तथा क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक राहुल गुप्ता (आईपीएस) के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। गोवा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में संगठित ड्रग तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

 

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