जिन्दल सॉ को 1400 बीघा अतिरिक्त भूमि देने के प्रस्ताव का विरोध तेज, संघर्ष समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी

खबर सार :-
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जनभावनाओं की अनदेखी करते हुए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है, तो क्षेत्र के नागरिकों को व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उनका कहना है कि जनहित से जुड़े मुद्दों की अनदेखी से क्षेत्र में असंतोष और जनआक्रोश बढ़ सकता है।
जिन्दल सॉ को 1400 बीघा अतिरिक्त भूमि देने के प्रस्ताव का विरोध तेज, संघर्ष समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ा: भीलवाड़ा जिले में खनन क्षेत्र के विस्तार के लिए जिन्दल सॉ लिमिटेड को लगभग 1400 बीघा अतिरिक्त भूमि आवंटित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। ओवरब्रिज बनाओ संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कंपनी को नई भूमि देने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समिति का कहना है कि जब तक कंपनी द्वारा पूर्व में किए गए जनहित से जुड़े वादों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक उसे अतिरिक्त भूमि आवंटित नहीं की जानी चाहिए।

स्टील प्लांट की स्थापना

समिति के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि जिन्दल सॉ लिमिटेड को पहले भी खनन कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। उस समय कंपनी ने क्षेत्रीय विकास और जनसुविधाओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण वादे किए थे, लेकिन उनमें से अधिकांश अब तक पूरे नहीं हुए हैं।

संघर्ष समिति के अनुसार, कंपनी ने रामधाम क्षेत्र के पास रेलवे ओवरब्रिज निर्माण, पुर क्षेत्र के दोनों तालाबों को स्वच्छ जल से भरने तथा क्षेत्र में स्टील प्लांट स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण आश्वासन दिए थे। समिति का दावा है कि ये वादे केवल मौखिक नहीं थे, बल्कि लिखित समझौतों और पंजीकृत अनुबंधों का भी हिस्सा थे। इसके बावजूद वर्षों बीत जाने के बाद भी इन परियोजनाओं पर अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दी है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में कंपनी अपने खनन क्षेत्र का विस्तार करने के लिए लगभग 1400 बीघा अतिरिक्त भूमि की मांग कर रही है और प्रशासनिक स्तर पर इस प्रस्ताव पर विचार भी किया जा रहा है। समिति का तर्क है कि किसी भी नए भूमि आवंटन से पहले यह मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि कंपनी ने पूर्व में किए गए वादों को किस हद तक पूरा किया है।

लंबे समय से रुके हैं प्रोजेक्ट

समिति ने विशेष रूप से रामधाम रेलवे ओवरब्रिज परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना आज भी धरातल पर साकार नहीं हो सकी है। इसके अलावा पुर क्षेत्र के तालाबों के पुनर्भरण और प्रस्तावित स्टील प्लांट की स्थापना जैसे मुद्दे भी अधूरे पड़े हैं। समिति का कहना है कि इन योजनाओं का सीधा लाभ स्थानीय नागरिकों को मिलना था, लेकिन लंबे समय से इन पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

ओवरब्रिज बनाओ संघर्ष समिति के सदस्यों लक्ष्मीनारायण डाड, दुर्गेश शर्मा, उम्मेदसिंह राठौड़, बाबूलाल जाजू, महेश सोनी, सत्यनारायण विश्नोई, ओम कसारा, अशोक मूंदड़ा, सीताराम खटीक और नेमचंद सिंघवी ने मांग की कि कंपनी को अतिरिक्त भूमि आवंटित करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। साथ ही कंपनी और प्रशासन के बीच हुए सभी पूर्व समझौतों एवं वादों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें निर्धारित समय सीमा में पूरा कराया जाए।

फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, भूमि आवंटन के प्रस्ताव और उसके विरोध को देखते हुए यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन और कंपनी की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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