सोनभद्र में ‘सनातन और भारत वर्ष’ विषय पर हुआ भव्य आयोजन, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने रखे विचार

खबर सार :-
कार्यक्रम के दौरान पूरे सभागार में राष्ट्र, संस्कृति और सनातन पर आधारित विमर्श को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन ने सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने का कार्य किया है।
सोनभद्र में ‘सनातन और भारत वर्ष’ विषय पर हुआ भव्य आयोजन, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने रखे विचार
खबर विस्तार : -

सोनभद्र: अनपरा तापीय परियोजना के आवासीय परिसर स्थित ऑडिटोरियम में ऊर्जांचल जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित “सनातन और भारत वर्ष : कल, आज और कल” विषयक भव्य कार्यक्रम ने राष्ट्र, संस्कृति और सामाजिक चिंतन के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा को मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में प्रख्यात पत्रकार एवं चिंतक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उनके संबोधन को सुनने के लिए सोनभद्र सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, जिसके चलते सभागार पूरी तरह खचाखच भरा रहा।

अपने संबोधन में पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सनातन संस्कृति, भारतीय सभ्यता, सामाजिक चेतना और समकालीन राजनीतिक परिदृश्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान हजारों वर्षों की परंपराओं और मूल्यों पर आधारित है, जिसे समझने और संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने समाज में जागरूकता और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को मजबूत करने पर भी बल दिया।

उन्होंने संविधान में अल्पसंख्यक की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर स्पष्ट परिभाषा और नीति को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। उनके अनुसार, किसी भी समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करने के मानदंडों पर स्पष्टता होना आवश्यक है ताकि नीति निर्माण में पारदर्शिता बनी रहे।

मंदिरों के प्रबंधन और उनकी आय के उपयोग के विषय को उठाते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों के संचालन और वित्तीय संसाधनों के उपयोग में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिरों से प्राप्त धनराशि का उपयोग समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों की शिक्षा, विवाह तथा अन्य सामाजिक आवश्यकताओं के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इसके लिए एक व्यवस्थित और पारदर्शी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने वोट बैंक की राजनीति, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के कार्यों की नियमित समीक्षा और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था लोकतंत्र को और मजबूत बना सकती है। उनके अनुसार, राष्ट्र और समाज के विकास के लिए सत्य, स्पष्टता और जनहित सर्वोपरि होने चाहिए।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर ऊर्जांचल जनकल्याण समिति के अध्यक्ष आर. डी. सिंह ने सभी अतिथियों, श्रोताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में प्रस्तुत विचार समाज को नई दिशा देने वाले हैं और उनसे प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण तथा सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर पूर्व सांसद राम सकल, आनंद कुमार सिंह (परियोजना प्रमुख, एमईआईएल अनपरा), वीरेन्द्र गोयल (अध्यक्ष, सिंगरौली विकास प्राधिकरण), पूर्व आईपीएस अधिकारी के. पी. सिंह, के. डी. जैन (महाप्रबंधक, खड़िया परियोजना), अजय कटिहार (परियोजना प्रमुख, अनपरा तापीय परियोजना), समिति के महामंत्री के. सी. जैन सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, पत्रकार, महिलाएं और युवा उपस्थित रहे।  बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता और विषय को लेकर दिखाई गई रुचि के कारण यह कार्यक्रम क्षेत्र में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहने की संभावना है।
 

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