Child Marriage : यूपी में धड़ल्ले से हो रहे बाल विवाह के लिए सीधे पुलिस ज़िम्मेदार! इलाहाबाद हाईकोर्ट की डीजीपी को फटकार, बोले- आंखें मूंदकर बैठी है खाकी, दूल्हों और मददगारों को भेजो जेल

खबर सार :-
Child Marriage : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते बाल विवाह (Child Marriage) पर यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि बाल विवाह करने वाले दूल्हों और शादी कराने वाले मददगारों के खिलाफ धारा 10 और 11 के तहत तुरंत केस दर्ज कर जेल भेजा जाए।

Child Marriage : यूपी में धड़ल्ले से हो रहे बाल विवाह के लिए सीधे पुलिस ज़िम्मेदार! इलाहाबाद हाईकोर्ट की डीजीपी को फटकार, बोले- आंखें मूंदकर बैठी है खाकी, दूल्हों और मददगारों को भेजो जेल
खबर विस्तार : -

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में नाबालिग बेटियों के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाली सामाजिक कुप्रथा बाल विवाह (Child Marriage) के लगातार बढ़ते ग्राफ पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बेहद तल्ख रुख अख्तियार किया है। अदालत ने राज्य में इस कुप्रथा के फलने-फूलने के लिए सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश पुलिस की घोर लापरवाही और निष्क्रियता को कसूरवार ठहराया है। न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि पुलिस तंत्र बाल विवाह (Child Marriage) जैसे गंभीर और संज्ञेय अपराधों को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। अदालत ने चिंता व्यक्त की कि कानून के रखवाले ही इस सामाजिक बुराई को बढ़ावा देने वाले मुख्य कारकों पर शिकंजा कसने में ढिलाई बरत रहे हैं, जिसके कारण ऐसी अवैध शादियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

पुलिस की नाकामी पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

उच्च न्यायालय ने इस कड़वी हकीकत को उजागर करते हुए टिप्पणी की कि आज तक उसके समक्ष पुलिस विभाग द्वारा की गई किसी भी ऐसी प्रभावी कार्रवाई का ब्यौरा नहीं आया, जिसमें बाल विवाह (Child Marriage) रचने वाले दूल्हों या इस कृत्य में सहयोग देने वाले बिचौलियों और परिजनों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की गई हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के कड़े प्रावधानों को धरातल पर लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। पुलिस थानों में तैनात जांच अधिकारी इन मामलों में मूकदर्शक बने रहते हैं, जिसका सीधा फायदा उन अपराधियों को मिल रहा है जो कानून की धज्जियां उड़ाकर नाबालिग लड़कियों का जीवन बर्बाद कर रहे हैं।

डीजीपी को कड़े सर्कुलर जारी करने का आदेश

अदालत की इस गंभीर नाराजगी के बाद राज्य के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। खंडपीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को कड़े लहजे में निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने डीजीपी को आदेश दिया है कि वे तत्काल प्रभाव से राज्य के सभी पुलिस कमिष्णरों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) और जिला पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन और कड़ा सर्कुलर जारी करें। इस सर्कुलर के तहत राज्य के प्रत्येक थाने को यह निर्देश दिया जाना अनिवार्य है कि जैसे ही किसी क्षेत्र में बाल विवाह (Child Marriage) की सूचना प्राप्त हो—चाहे वह किसी शिकायत के माध्यम से हो, किसी अन्य मामले की जांच के दौरान सामने आई हो, या फिर पुलिस ने स्वयं उस पर संज्ञान लिया हो—बिना किसी देरी के त्वरित कानूनी कदम उठाए जाएं।

दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी

खंडपीठ ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 10 और धारा 11 के तहत बिना किसी हीला-हवाली के तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। धारा 10 के तहत बाल विवाह (Child Marriage) संपन्न कराने वाले पंडित, मौलवी या किसी भी अन्य धर्मगुरु और विवाह के आयोजकों पर मुकदमा चलाने का प्रावधान है। वहीं धारा 11 उन लोगों को दंडित करने की बात करती है जो इस प्रकार के अवैध विवाह को अपनी अनुमति देते हैं, बढ़ावा देते हैं या उसे रोकने का प्रयास नहीं करते। अदालत ने कहा कि जब तक विवाह करने वाले बालिग दूल्हे और इन धाराओं के तहत मददगारों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा, तब तक इस अपराध का ग्राफ नीचे नहीं आएगा।

नाबालिग के कथित निकाह का पूरा मामला

यह पूरा मामला उस वक्त प्रकाश में आया जब आज़ाद अंसारी और उसके परिवार के कुछ सदस्यों ने उच्च न्यायालय में एक आपराधिक रिट याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज अपहरण की एफआईआर को रद्द करने की गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ताओं पर आरोप था कि उन्होंने एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसे जबरन शादी के बंधन में बांधा। याचिकाकर्ता पक्ष का अदालत में यह तर्क था कि नाबालिग लड़की ने इसी साल मार्च के महीने में अपनी पूरी सहमति से मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार आज़ाद अंसारी से निकाह किया था। उनका दावा था कि लड़की बिना किसी डर, दबाव या ज़ोर-ज़बरदस्ती के अपने शौहर के साथ रह रही है, इसलिए इस मामले को आपसी रजामंदी मानकर आपराधिक मामले को निरस्त कर दिया जाना चाहिए।

सरकारी वकील की तीखी दलीलें और विरोध

इसके विपरीत, राज्य सरकार की ओर से उपस्थित सरकारी वकील ने याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अकाट्य तर्कों के साथ अदालत को बताया कि पीड़ित लड़की कानूनन पूरी तरह नाबालिग है और उसकी उम्र विवाह के योग्य बिल्कुल नहीं है। आरोपी ने उसे बहला-फुसलाकर उसके माता-पिता की कानूनी देखरेख से अगवा किया, जो कि एक गंभीर अपराध है। सरकारी वकील ने खंडपीठ के समक्ष यह स्पष्ट किया कि आरोपी को भली-भांति ज्ञात था कि लड़की की आयु बेहद कम है, जिसके चलते यह विवाह पूरी तरह से एक गैर-कानूनी बाल विवाह (Child Marriage) की श्रेणी में आता है, जो भारतीय कानून के तहत दंडनीय है। उन्होंने दलील दी कि आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत इस कृत्य को अंजाम दिया है, इसलिए उनकी याचिका को तुरंत खारिज किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, दिए सख्त निर्देश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को गहराई से सुनने और केस डायरी के दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध का बेहद मजबूत मामला बनता है। बेंच ने आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं, ऐसे में इस मोड़ पर प्राथमिकी को रद्द करना न्यायसंगत नहीं होगा।

फैसला सुनाने के साथ ही अदालत ने उस व्यापक प्रशासनिक और सामाजिक विफलता पर गहरी चिंता जताई, जिसके कारण समाज में यह बुराई लगातार अपनी जड़ें मजबूत कर रही है। अदालत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि बाल विवाह (Child Marriage) कराने वाले विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठन तथा परिवार, कानूनी उम्र को दरकिनार करने के लिए बच्ची के आधार कार्ड या किसी फर्जी हलफनामे का अनुचित सहारा लेते हैं। अदालत ने साफ किया कि आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को किसी भी सूरत में आयु का अंतिम और वैध प्रमाण नहीं माना जा सकता, विशेषकर ऐसे संवेदनशील मामलों में जहां किसी नाबालिग का भविष्य दांव पर लगा हो। अदालत ने संबंधित जांच अधिकारी को सख्त निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले की तफ्तीश को बाल विवाह विरोधी कानून के चश्मे से देखे और सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करे।

अन्य प्रमुख खबरें