तिरुवल्लूरः जिले के पेरियापलायम के पास रविवार को एक सीफूड एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया गैस लीक होने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में कम से कम छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल फैल गया।
जानकारी के अनुसार यह लीक सीफूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जुड़ी फैक्ट्री में हुआ, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। घटना के समय परिसर में लगभग 120 मजदूर मौजूद थे, जिनमें असम, ओडिशा और झारखंड की कई महिलाएं भी शामिल थीं। प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक गैस रिसाव यूनिट के रेफ्रिजरेशन या प्रोसेसिंग सिस्टम से शुरू हुआ और धीरे-धीरे फैक्ट्री के कुछ हिस्सों में फैल गया।
गैस के संपर्क में आने के बाद मजदूरों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, चक्कर और घबराहट जैसी समस्याएं होने लगीं। कुछ श्रमिकों की हालत इतनी गंभीर हो गई कि उनके मुंह और नाक से खून निकलने की भी सूचना मिली, जिससे स्थिति की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई मजदूर मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े, जबकि अन्य किसी तरह बाहर निकलने की कोशिश में भागते नजर आए।
घटना के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। तुरंत ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। प्रभावित मजदूरों को पहले नजदीकी निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए चेन्नई स्थित गवर्नमेंट स्टेनली मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया।
प्रारंभिक चरण में पुलिस सूत्रों ने एक मजदूर की मौत की पुष्टि की थी, लेकिन जैसे-जैसे इलाज और रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ा, मृतकों की संख्या बढ़कर कम से कम छह तक पहुंच गई। कई अन्य श्रमिक अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार अमोनिया गैस के सीधे संपर्क में आने से श्वसन तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसके कारण कई मरीजों को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही है।
घटना के बाद तमिलनाडु सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हादसे पर गहरी चिंता जताते हुए प्रभावित मजदूरों को हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश भी दिया है, जो घटना के कारणों की विस्तृत जांच करेगी।
सरकारी आदेश के अनुसार यह समिति फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों, रखरखाव प्रक्रिया और संभावित तकनीकी खामियों की जांच करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं औद्योगिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस दुर्घटना का कारण बनी। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा ऑडिट और औद्योगिक इकाइयों की जांच तेज करने के संकेत दिए हैं।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था और प्रवासी मजदूरों की कार्य स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी भी कई मजदूरों की हालत नाजुक बनी हुई है और प्रशासन लगातार राहत एवं चिकित्सा कार्य में जुटा हुआ है।
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