नई दिल्ली: मौसम के मिजाज में इस समय एक अभूतपूर्व उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जिसने देश के कई हिस्सों के जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department - IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance), वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और तेजी से आगे बढ़ते दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) के त्रिकोणीय प्रभाव के कारण पूरे देश के मौसम में भारी फेरबदल हुआ है। इसके कारण उत्तर से लेकर पूर्वी और मध्य भारत के एक बड़े भूभाग पर धूल भरी आंधियों, गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया है। भीषण गर्मी (Intense Summer Heat) से परेशान लोगों को जहां कुछ क्षेत्रों में राहत मिली है, वहीं कई इलाकों में आफत और तबाही का खतरा भी पैदा हो गया है।
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, विशेषकर दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR), पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ली है। दिन के समय धूल भरी तेज आंधियों के साथ बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली कड़कने (Lightning Activity) की घटनाएं सामने आ रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन क्षेत्रों में हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच रही है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमट गया है, जिससे झुलसाने वाली लू से बड़ी राहत मिली है। हालांकि, अचानक आने वाले इन तूफानों को देखते हुए प्रशासन ने आम जनता को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की सख्त हिदायत दी है।
दूसरी ओर, राजस्थान के रेगिस्तानी और पश्चिमी जिलों में प्रकृति का बेहद आक्रामक रूप देखने को मिल रहा है। राज्य में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली धूल भरी आंधी (Dust Storm) को लेकर विशेष चेतावनी जारी की गई है। इस अंधड़ के कारण दृश्यता (Visibility) लगभग शून्य हो गई है, जिससे सड़क यातायात और परिवहन सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गई हैं। अचानक आए इस रेतीले बवंडर ने राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इसके विपरीत, पूर्वी हिमालय के तराई वाले इलाकों में पानी का तांडव शुरू हो चुका है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए मौसम विभाग ने 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया है। इन इलाकों में 200 मिमी से अधिक की अत्यंत भारी वर्षा (Very Heavy Rainfall) होने की आशंका जताई गई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ (Flash Floods) और भूस्खलन (Landslides) का खतरा चरम पर पहुंच गया है। असम, मेघालय और बिहार जैसे राज्यों में भी 'येलो अलर्ट' के बीच मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है।
इस सबके बीच, दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) निरंतर अपनी रफ्तार पकड़ रहा है। वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के हिस्सों को छू रही है। अगले चार से पांच दिनों में इसके छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में प्रवेश करने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। मानसून के इस विस्तार से कृषि कार्यों और खरीफ फसलों की बुआई (Sowing of Kharif Crops) को जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, इसके बावजूद छत्तीसगढ़, तेलंगाना और विदर्भ के कुछ अंदरूनी हिस्सों में अब भी छिटपुट रूप से भीषण लू (Heatwave Conditions) का प्रकोप बना हुआ है, जिससे तटीय आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में अत्यधिक उमस और बेचैनी का माहौल है।
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