Ram Mandir Donation Case: आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे फैजाबाद बार के वकील, सीबीआई जांच की उठाई मांग

खबर सार :-

बार एसोसिएशन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना है। राम जन्मभूमि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी कथित वित्तीय अनियमितता के मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
Ram Mandir Donation Case: आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे फैजाबाद बार के वकील, सीबीआई जांच की उठाई मांग

खबर विस्तार : -

अयोध्याः अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर फैजाबाद बार एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लिया है। एसोसिएशन ने घोषणा की है कि इस मामले में बनाए गए आरोपियों की ओर से उसका कोई भी सदस्य अदालत में पैरवी नहीं करेगा। साथ ही, पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग भी दोहराई गई है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच जरूरी है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष ने दी जानकारी

फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में अधिवक्ता संघ की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार यदि संघ का कोई सदस्य आरोपियों की ओर से वकालतनामा दाखिल करता है, तो उसे प्रति आरोपी पांच लाख रुपये की सहयोग राशि बार एसोसिएशन के पास जमा करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग अभियोजन पक्ष की कानूनी कार्रवाई और मुकदमे से जुड़े खर्चों के लिए किया जाएगा।

कालिका मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई बाहरी अधिवक्ता आरोपियों की ओर से अदालत में पेश होता है, तो अधिवक्ता संघ उसका विरोध करेगा। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि संबंधित अधिवक्ता का सरकार, विश्व हिंदू परिषद या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से कोई संबंध तो नहीं है।

सीबीआई से जांच की मांग

मामले की पैरवी को मजबूत बनाने के लिए बार एसोसिएशन ने करीब 15 अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया है। यह पैनल अभियोजन पक्ष की ओर से कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करेगा। इसके अतिरिक्त 12 अन्य लोगों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए संबंधित अदालत में आवेदन प्रस्तुत करेंगे।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यदि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है, तो संघ अदालत का दरवाजा खटखटाएगा। अदालत में याचिका दाखिल कर संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की जाएगी। इसके साथ ही यह अनुरोध भी किया जाएगा कि जांच पूरी होने तक उन्हें अयोध्या से बाहर जाने की अनुमति न दी जाए।

कालिका मिश्रा ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग दोहराते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता है। उनके अनुसार, इस संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पहले से याचिकाएं लंबित हैं। यदि हाई कोर्ट सीबीआई जांच का आदेश नहीं देता है, तो अधिवक्ता संघ स्वयं आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई जांच से बचने के उद्देश्य से सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

निष्पक्ष जांच की मांग

उन्होंने यह भी कहा कि जांच केवल वर्तमान में गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। संघ का मानना है कि पूरे मामले की गहन जांच से ही वास्तविक तथ्य सामने आ सकेंगे और किसी भी तरह की आशंकाओं का समाधान होगा।

अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने यह भी दावा किया कि स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं और सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए संघ सीबीआई जांच की मांग कर रहा है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और लोगों के मन में पैदा हुई शंकाओं का समाधान हो।

बार एसोसिएशन के इस फैसले ने मामले को नया कानूनी और राजनीतिक आयाम दे दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच एजेंसियां और न्यायालय आगे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं तथा सीबीआई जांच की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।

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