नई दिल्ली : रेल मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि सरकार ने जम्मू-कटरा और हावड़ा-दिल्ली रेल कॉरिडोर पर सुरक्षा, कनेक्टिविटी और परिचालन दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य से 1,200 करोड़ रुपए के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है।
मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने उत्तरी रेलवे के जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा सेक्शन पर ढलानों को स्थिर करने, सुरंगों के पुनर्वास और पुल संरक्षण कार्यों के लिए 238 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। बयान में मंत्रालय ने आगे बताया कि मंजूर किए गए कार्यों में ढलान स्थिरीकरण, पुनर्वास उपाय, सुरंगों में पानी रिसाव की समस्या का समाधान, पुल सुरक्षा कार्य और संवेदनशील स्थानों पर अन्य सुरक्षा संबंधी काम शामिल हैं।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये परियोजनाएं देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में सुरक्षित और भरोसेमंद रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि कटिंग, पुलों और सुरंगों का विस्तृत आकलन करने के बाद इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेल सेक्शन की दीर्घकालिक सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए संरक्षण और पुनर्वास कार्यों को मंजूरी दी गई है।
जम्मू-कटरा सेक्शन को कठिन भू-भाग, प्रतिकूल भूवैज्ञानिक परिस्थितियों और खराब मौसम के कारण कई इंजीनियरिंग और परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है। सरकार के अनुसार, नए सुरक्षा और पुनर्वास उपायों से यह मार्ग अधिक मजबूत बनेगा और हर साल इस रूट पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा बेहतर होगी।
एक अन्य फैसले में सरकार ने 54 किलोमीटर लंबे किउल-झाझा थर्ड लाइन प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है, जिसकी लागत 962 करोड़ रुपए होगी। यह परियोजना उच्च घनत्व वाले हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर का हिस्सा है और इसका उद्देश्य रेल क्षमता बढ़ाना, परिचालन दक्षता सुधारना तथा पूर्वी और उत्तरी भारत में यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को मजबूत करना है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, किउल और झाझा के बीच मौजूदा डबल लाइन सेक्शन अभी अपनी क्षमता से अधिक दबाव में काम कर रहा है और आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर पर ट्रैफिक और बढ़ने की संभावना है। प्रस्तावित थर्ड लाइन परियोजना से लाइन क्षमता में बड़ा सुधार होगा, भीड़भाड़ कम होगी और यात्री व मालगाड़ियों की आवाजाही ज्यादा सुगम बनेगी। इसके अलावा, यह मार्ग कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को बिहार के रक्सौल से जोड़ता है, जो नेपाल सीमा के पास स्थित है। यह कॉरिडोर बरह एसटीपीपी, जवाहर एसटीपीपी और बीरगंज आईसीडी जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े भारी माल ढुलाई ट्रैफिक को भी संभालता है।
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