पीएम मोदी ने ओस्लो से रचा नया इतिहास, ड्रैगन और पश्चिमी देशों के छूटे पसीने, नॉर्डिक देशों के साथ शुरू हुआ ‘स्वर्णिम युग’!

खबर सार :-
India-Nordic Strategic Partnership : ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के नए स्वर्णिम युग की घोषणा की। हरित प्रौद्योगिकी, रक्षा, साइबर सुरक्षा और वैश्विक शांति पर ऐतिहासिक समझौतों के साथ 'India-Nordic Strategic Partnership' ने वैश्विक कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। जानिए इस महा-समझौते के सभी रणनीतिक पहलू।

पीएम मोदी ने ओस्लो से रचा नया इतिहास, ड्रैगन और पश्चिमी देशों के छूटे पसीने, नॉर्डिक देशों के साथ शुरू हुआ ‘स्वर्णिम युग’!
खबर विस्तार : -

ओस्लो (नॉर्वे): वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत ने एक बार फिर अपनी अद्वितीय और रणनीतिक धमक का लोहा मनवाया है। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित तीसरे ऐतिहासिक भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (India-Nordic Summit) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, आधुनिक तकनीक और सतत विकास के नए आयामों को छूने वाली एक ऐतिहासिक India-Nordic Strategic Partnership की घोषणा की। इस महा-सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल भारत की तीव्र विकास यात्रा (Growth Story) का खाका दुनिया के सामने रखा, बल्कि नॉर्डिक देशों के साथ व्यापारिक और भू-राजनीतिक संबंधों में एक अभूतपूर्व ‘स्वर्णिम युग’ की शुरुआत की आधिकारिक घोषणा भी की। इस शिखर वार्ता के बाद आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण संयुक्त प्रेस वार्ता (Joint Press Meet) में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के सबसे दूरदर्शी और समृद्ध देशों के शासनाध्यक्षों के साथ वैश्विक तनाव, पश्चिम एशिया संकट और यूक्रेन युद्ध जैसे संवेदनशील विषयों पर भारत का रुख अत्यंत स्पष्ट और बेबाक शब्दों में साझा किया।

इस शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा सस्टेनेबिलिटी (Sustainability), इनोवेशन (Innovation), क्लीन एनर्जी (Clean Energy), उभरती हुई नई टेक्नोलॉजी (New Technology) और एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित तथा समृद्ध वैश्विक भविष्य की नींव को मजबूत करना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्डिक देशों जिसमें नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड शामिल हैं, के नेताओं के साथ गहन और व्यापक चर्चा की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और नॉर्डिक देशों का यह ऐतिहासिक मिलन केवल दो क्षेत्रों का जुड़ाव नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, कानून के शासन (Rule of Law) और बहुपक्षवाद (Multilateralism) के प्रति एक साझी और अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। यही मूल्य भारत और इन उत्तरी यूरोपीय देशों को एक स्वाभाविक और अटूट साझेदार (Natural Partners) बनाते हैं। आठ वर्ष पहले शुरू हुआ यह कूटनीतिक सफर आज वैश्विक व्यवस्था को बदलने की ताकत रख रहा है।

व्यापारिक और आर्थिक संबंधों में ऐतिहासिक उछाल: 10 वर्षों में 4 गुना व्यापार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पिछले एक दशक के भीतर भारत और नॉर्डिक देशों के आर्थिक रिश्तों में आए क्रांतिकारी बदलावों के आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत किए, जिसने पूरी दुनिया के अर्थशास्त्रियों को चौंका दिया है। पीएम मोदी ने गौरवपूर्वक साझा किया कि पिछले 10 वर्षों में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) में चार गुना से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, नॉर्डिक देशों के विशाल और समृद्ध इन्वेस्टमेंट फंड्स (Investment Funds) आज भारत की रैपिड ग्रोथ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भरोसेमंद हिस्सा बन चुके हैं।

पिछले दस वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो नॉर्डिक देशों से भारत में होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में लगभग 200 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेजी से बढ़ता हुआ यह व्यापार और निवेश न केवल भारत की विकास गाथा को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है, बल्कि इसने नॉर्डिक देशों की घरेलू अर्थव्यवस्थाओं में भी अत्यंत सकारात्मक और दूरगामी भूमिका निभाई है। भारत के साथ व्यापारिक सहयोग के कारण नॉर्डिक देशों में हजारों नई नौकरियों और रोजगार के नए अवसरों का सृजन हुआ है, जिसने वहां के नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है।

इस मजबूत और ऐतिहासिक व्यापारिक नींव को और अधिक विस्तार देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि हाल ही में भारत ने कुछ अत्यंत दूरगामी और रणनीतिक फैसले लिए हैं। अक्टूबर 2025 से भारत ने नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य ईएफटीए (EFTA) देशों के साथ एक व्यापक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (Trade and Economic Partnership Agreement) को पूरी तरह लागू कर दिया है। इसके साथ ही, कुछ महीनों पहले ही भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को भी मूर्त रूप दिया गया है, जिसमें डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन जैसे महत्वपूर्ण देश प्रत्यक्ष रूप से भागीदार हैं। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, इन क्रांतिकारी व्यापार समझौतों के माध्यम से हम India-Nordic Strategic Partnership के आपसी संबंधों में एक बिल्कुल नए, समृद्ध और ऐतिहासिक स्वर्णिम युग की औपचारिक शुरुआत करने जा रहे हैं, जो भविष्य में वैश्विक व्यापार का मार्ग तय करेगा।

ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय विशेषज्ञता का महा-संगम

इस शिखर सम्मेलन का सबसे अनूठा और क्रांतिकारी पहलू भारत की विशाल क्षमता (Scale) और नॉर्डिक देशों की अत्याधुनिक विशेषज्ञता (Skill) का अनूठा महा-संगम है। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत और नॉर्वे ने अपने आपसी संबंधों को 'ग्रीन टेक्नोलॉजी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी' (Green Technology and Innovation Strategic Partnership) के रूप में एक नया और आधुनिक ढांचा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस अनूठी India-Nordic Strategic Partnership के तहत पूरे विश्व के कल्याण के लिए एक स्थायी ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है।

प्रधानमंत्री ने इस साझेदारी के रणनीतिक पहलुओं को विस्तार से समझाते हुए कहा कि हम आइसलैंड की ‘जीरो थर्मल इफिशिएंसी’ (Zero Thermal Efficiencies), नॉर्वे की समृद्ध ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) तथा आर्कटिक और सभी नॉर्डिक देशों की मैरिटाइम सस्टेनेबिलिटी (Maritime Sustainability) की विश्वस्तरीय विशेषज्ञता को भारत के असीमित स्केल और बाजार के साथ जोड़ेंगे। इस महा-गठबंधन का मुख्य उद्देश्य केवल दो पक्षों का विकास करना नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक अधिक सुरक्षित, प्रदूषण मुक्त और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है।

तकनीक और रक्षा के क्षेत्र में विश्वसनीय समाधान: आत्मनिर्भर भारत को बल

इस विशेष और विशिष्ट रणनीतिक गठजोड़ का एक और बड़ा और दूरगामी स्तंभ सुरक्षा और अत्याधुनिक तकनीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक India-Nordic Strategic Partnership के गठन से हम स्वीडन की दुनिया की सबसे एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस टेक्नोलॉजी (Advanced Manufacturing and Defense), फिनलैंड की अग्रणी टेलीकॉम और डिजिटल तकनीक (Telecom and Digital Technology), और डेनमार्क की विश्वप्रसिद्ध साइबर सिक्योरिटी और हेल्थ-टेक (Cyber Security and Health-Tech) क्षमताओं को भारत के पास उपलब्ध दुनिया के सबसे बड़े युवा टैलेंट (Talent Pool) के साथ जोड़ रहे हैं। इन दोनों शक्तियों के मिलन से भारत और नॉर्डिक देश मिलकर पूरी दुनिया के लिए सबसे भरोसेमंद, सुरक्षित और सस्ते डिजिटल व तकनीकी समाधान (Reliable Solutions) विकसित करेंगे, जो पश्चिमी और एशियाई बाजारों में एक नया संतुलन स्थापित करेंगे।

भारत-नॉर्डिक साझेदारी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अटूट स्तंभ हमारी साझी और व्यापक रिसर्च तथा इनोवेशन (Research and Innovation) प्रणाली भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कूटनीतिक रोडमैप साझा करते हुए कहा कि इस नवाचार के पहिए को और तेज करने के लिए दोनों पक्ष मिलकर अपनी यूनिवर्सिटीज, अग्रणी स्टार्टअप्स और वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं (Labs Ecosystem) के बीच आपसी संपर्क और लिंकेज को कई गुना बढ़ाएंगे। इसके साथ ही, बदलते वैश्विक पर्यावरण के इस दौर में आर्कटिक और पोलर रिसर्च (Arctic and Polar Research) में भी दोनों क्षेत्रों के वैज्ञानिक अपने सहयोग को और अधिक गहरा करेंगे, जिससे जलवायु परिवर्तन के रहस्यों को समझने में मदद मिलेगी। भारत और नॉर्डिक देशों के बीच कौशल विकास (Skill Development) और मोबिलिटी (Mobility) के नए रास्ते खोले जाएंगे, जिससे भारतीय युवाओं के लिए यूरोप में रोजगार और उच्च शिक्षा के अभूतपूर्व और सुरक्षित अवसर सुनिश्चित होंगे।

वैश्विक तनाव पर भारत का दोटूक रुख: नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था पर जोर

शिखर सम्मेलन के दौरान केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और अशांति के माहौल पर भी अत्यंत गंभीर और गहन मंथन हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त प्रेस मीट में दुनिया को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि आज जब पूरा विश्व विभिन्न क्षेत्रों में तनाव, युद्ध और संघर्ष के एक बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में भारत और नॉर्डिक देश कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। हम दोनों पक्ष मिलकर एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करते हैं जो 'नियम आधारित ग्लोबल ऑर्डर' (Rules-based Global Order) पर टिकी हो, जहाँ किसी भी देश की संप्रभुता का हनन न हो।

यूक्रेन संकट हो या पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) का भयानक संघर्ष, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पारंपरिक और शांतिप्रिय रुख को दोहराते हुए कहा कि भारत हमेशा से ही हिंसक संघर्षों की तुरंत समाप्ति और कूटनीतिक स्तर पर शांति के प्रयासों का पुरजोर समर्थन करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित दुनिया के तमाम बहुपक्षीय संस्थानों में व्यापक सुधार (Reforms) की वकालत की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को देखते हुए बहुपक्षीय संस्थाओं का रिफॉर्म न केवल आवश्यक है, बल्कि यह समय की सबसे बड़ी मांग और तुरंत जरूरी कदम भी है। इस ऐतिहासिक ओस्लो समिट के मंच से भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह एक जिम्मेदार वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभर चुका है और यह नई India-Nordic Strategic Partnership आने वाले समय में विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने में एक गेम-चेंजर साबित होगी।

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