गृह मंत्रालय की नई अधिसूचना से नागरिकता प्रक्रिया हुई और सख्त, विदेशी आवेदकों के लिए पासपोर्ट डिटेल अनिवार्य
खबर सार :-
गृह मंत्रालय द्वारा नागरिकता नियमों में किया गया यह संशोधन भारत की नागरिकता प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले आवेदकों के लिए पासपोर्ट विवरण अनिवार्य होने से फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही, सीएए के तहत आने वाले मामलों की जांच प्रक्रिया भी अब और मजबूत हो सकेगी।
खबर विस्तार : -
India Citizenship Rules 2026: भारत सरकार ने नागरिकता आवेदन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय (एमएचए) ने नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अब अपने पासपोर्ट की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसमें वैध और समाप्त हो चुके दोनों प्रकार के पासपोर्ट शामिल होंगे।
18 मई 2026 को जारी इस अधिसूचना के अनुसार, नागरिकता आवेदन करने वाले आवेदकों को अपने पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, जारी करने का स्थान और समाप्ति तिथि जैसी विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही आवेदक को यह स्पष्ट घोषणा भी करनी होगी कि उसके पास संबंधित देश का कोई वैध या एक्सपायर पासपोर्ट है या नहीं। सरकार का कहना है कि यह कदम नागरिकता प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और सुरक्षा एजेंसियों को सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है।
नागरिकता नियम, 2009 के अंतर्गत जोड़ा गया नया पैराग्राफ 3ए
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में नागरिकता नियम, 2009 के अंतर्गत नया पैराग्राफ 3ए जोड़ा गया है। इस प्रावधान के अनुसार, आवेदक को लिखित रूप से यह सहमति देनी होगी कि भारतीय नागरिकता मिलने के 15 दिनों के भीतर वह अपना पासपोर्ट संबंधित डाक अधीक्षक या वरिष्ठ अधीक्षक को जमा कर देगा। यह नियम विशेष रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के उन नागरिकों पर लागू होगा जो भारत की नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं। सरकार का मानना है कि इससे नागरिकता प्रक्रिया में दोहरी पहचान या फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की संभावना को कम किया जा सकेगा।
सुरक्षा एजेंसियों की मांग पर लिया गया फैसला
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नागरिकता आवेदन प्रक्रिया को और सख्त बनाने की मांग कर रही थीं। कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों और गलत पहचान के जरिए नागरिकता हासिल करने की कोशिशें सामने आई थीं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए सरकार ने अब पासपोर्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि नए नियमों से न केवल आवेदन प्रक्रिया मजबूत होगी बल्कि सुरक्षा जांच भी अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी। इससे नागरिकता आवेदन करने वाले व्यक्तियों की पहचान और पृष्ठभूमि का सत्यापन करना आसान होगा।
नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत जारी हुआ संशोधन
गृह मंत्रालय ने यह संशोधन नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 18 के तहत जारी किया है। अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया है कि यह नियम राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएंगे। संयुक्त सचिव गया प्रसाद द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह बदलाव मौजूदा नागरिकता प्रक्रिया को और मजबूत करने तथा प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
सीएए से जुड़े आवेदनों पर भी पड़ेगा असर
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू किया था। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था। अब नए नियम लागू होने के बाद सीएए के तहत आने वाले आवेदनों की जांच प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक सख्त हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे केवल वास्तविक और पात्र आवेदकों को ही नागरिकता मिल सकेगी तथा फर्जी दावों पर रोक लगेगी।
नागरिकता प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे नागरिकता आवेदन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और रिकॉर्ड प्रबंधन में भी आसानी होगी। हालांकि, कुछ मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि दस्तावेजों की जटिल प्रक्रिया के कारण कई वास्तविक आवेदकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद सरकार ने साफ किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
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