नई दिल्ली: देश की आम जनता की जेब पर एक बार फिर चौतरफा हमला हुआ है। वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच भारत में fuel crisis in India (ईंधन संकट) गहरा गया है। सरकारी क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने आम आदमी को तगड़ा झटका देते हुए एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी इजाफा कर दिया है। आज सुबह से पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की नई बढ़ोतरी लागू हो गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महज सात दिनों के भीतर आम उपभोक्ताओं पर यह दूसरा बड़ा आर्थिक बोझ डाला गया है, जिससे पूरे देश में त्राहि-त्राहि मच गई है।
भारतीय तेल निगम (इंडियन ऑयल) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस ताजा वृद्धि के बाद देश की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल का भाव 87 पैसे की छलांग लगाकर 98.64 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, डीजल भी पीछे नहीं रहा और 91 पैसे की बढ़ोतरी के साथ 91.58 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को छू चुका है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में तो हालात और भी बदतर हैं। मुंबई में पेट्रोल 91 पैसे महंगा होकर 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94 पैसे की तेजी के साथ 94.08 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
कोलकाता की बात करें तो वहाँ के नागरिकों को सबसे बड़ा झटका लगा है, जहाँ पेट्रोल की कीमतें 96 पैसे प्रति लीटर बढ़कर रिकॉर्ड 109.70 रुपये पर पहुंच गई हैं, जबकि डीजल 94 पैसे की तेजी के साथ 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई में भी पेट्रोल 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये और डीजल 86 पैसे की वृद्धि के साथ 96.11 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। गौरतलब है कि इस तबाही की शुरुआत पिछले शुक्रवार को ही हो गई थी, जब सरकार ने एक झटके में देश भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी की थी। इस तरह देखें तो fuel crisis in India (ईंधन संकट) ने आम जनता का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
कीमतें बढ़ने की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और समाचारों में फैली, देश के अलग-अलग हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर अचानक गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलने लगीं। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से लेकर दिल्ली और मुंबई तक, लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए आधी रात से ही लाइनों में लग गए। बलिया के एक स्थानीय पेट्रोल पंप पर खड़े उपभोक्ताओं में इस बात का डर साफ देखा गया कि आने वाले दिनों में कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
दिल्ली में सुबह-सुबह दफ्तर जाने के लिए निकले एक कामकाजी नागरिक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "हमें तो सुबह घर से निकलते ही इस बात का पता चला कि जेब कट चुकी है। हर बार 2 से 3 रुपये की यह बढ़ोतरी हमारे पूरे महीने के घरेलू बजट को तबाह कर देती है। वैश्विक स्तर पर क्या हो रहा है, उससे ज्यादा जरूरी हमारे लिए यह देखना है कि हमारे घर का चूल्हा कैसे जलेगा।"
सड़कों पर कपड़े बेचकर अपना गुजारा करने वाले एक छोटे व्यापारी ने बेहद भावुक होते हुए कहा, "मैं रोज़ाना मोटरसाइकिल से अलग-अलग बाजारों में कपड़े बेचने जाता हूँ। मेरी रोज़ की कमाई पहले ही सीमित है। अब जब ईंधन की कीमतें इस रफ्तार से भागेंगी, तो मेरी बचत शून्य हो जाएगी। कमाई घट रही है और खर्चे आसमान छू रहे हैं।" बढ़ती महंगाई के चलते fuel crisis in India (ईंधन संकट) अब केवल गाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के निवाले पर संकट बनता जा रहा है। दिल्ली के निवासी कृष्णा पाठक ने कहा कि सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि गैस से लेकर तेल तक सब कुछ आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
तेल के दामों में लगी इस आग ने देश के सियासी तापमान को भी चरम पर पहुंचा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने इस मूल्य वृद्धि का पुरजोर बचाव किया है। तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने साफ तौर पर कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भीषण संकट और युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय बाजारों में यह मामूली बदलाव अपरिहार्य यानी जरूरी हो गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों के कारण भारत के पास पर्याप्त तेल का भंडार मौजूद है और देश में ईंधन की कोई भौतिक कमी नहीं होगी। उन्होंने जनता से समझदारी दिखाते हुए कारपूलिंग और सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
इसी क्रम में भाजपा के दिग्गज नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए विपक्ष को घेरा। उन्होंने लिखा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट आने के कारण वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि जहाँ अमेरिका में पेट्रोल 44.5% और डीजल 48.1% महंगा हुआ, वहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान जैसे देशों में भी 30 से 54 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके मुकाबले भारत में इस fuel crisis in India (ईंधन संकट) के दौर में भी पेट्रोल में सिर्फ 3.2% और डीजल में 3.4% की ही वृद्धि हुई है, जो दुनिया में सबसे कम है।
दूसरी तरफ, विपक्ष इस दलील को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के प्रमुख और विधायक एम कोदंडराम ने इसे देश के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने अंदेशा जताया कि आने वाले दिनों में पेट्रोल की कीमतें 10 रुपये तक और बढ़ सकती हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और हर एक रोजमर्रा की चीज के दाम दोगुने हो जाएंगे। वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने विदेशी मित्रों के युद्ध का बहाना बनाकर देश की गरीब जनता पर अत्यधिक टैक्स वसूल रही है और महंगाई को जानबूझकर बढ़ावा दे रही है।
निश्चित रूप से, वैश्विक बाजार के समीकरण जो भी हों, लेकिन धरातल पर इस fuel crisis in India (ईंधन संकट) ने भारतीय परिवारों के सामने एक गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में सरकार टैक्स में कटौती करके जनता को कोई राहत देती है या फिर महंगाई का यह मीटर ऐसे ही भागता रहेगा।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल और डीजल के दामों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जहां आज विभिन्न पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों में मामूली अंतर दर्ज किया गया है। इसके तहत राजधानी में आज पेट्रोल की न्यूनतम दर ₹97.53 प्रति लीटर और अधिकतम दर ₹98.04 प्रति लीटर रही, जबकि डीजल की न्यूनतम दर ₹90.81 प्रति लीटर और अधिकतम दर ₹91.72 प्रति लीटर दर्ज की गई है।
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