नई दिल्ली: दिल्ली की सियासत में पिछले कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल अब सोशल मीडिया के डेटा में तब्दील होती दिख रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) के 'पोस्टर बॉय' कहे जाने वाले राघव चड्ढा का पाला बदलना उन्हें डिजिटल मोर्चे पर भारी पड़ता दिख रहा है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के फैसले से उनके युवा प्रशंसक इस कदर नाराज हैं कि महज 72 घंटों के भीतर उनके इंस्टाग्राम परिवार से 23 लाख सदस्य कम हो गए हैं।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तब शुरू हुई जब राघव चड्ढा अकेले नहीं, बल्कि अपने साथ 'आप' के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों को लेकर भाजपा के खेमे में चले गए। इस कदम को तकनीकी रूप से 'विलय' का रूप दिया गया, जिसे सोमवार को राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस विलय के साथ ही राज्यसभा में भाजपा का संख्या बल 106 से उछलकर 113 पर पहुंच गया है, वहीं आम आदमी पार्टी महज 3 सांसदों पर सिमट गई है। हालांकि, असली झटका राघव को वर्चुअल दुनिया में लगा है। शुक्रवार को उनके इंस्टाग्राम पर 14.6 मिलियन फॉलोअर्स थे। शनिवार दोपहर तक यह आंकड़ा गिरकर 13.3 मिलियन रह गया। सोमवार, 27 अप्रैल तक यह गिरावट थमी नहीं और अब उनके फॉलोअर्स की संख्या 12.3 मिलियन पर आ टिकी है।
राघव चड्ढा की राजनीति में सबसे बड़ी ताकत उनकी वह छवि थी जो उन्हें पारंपरिक नेताओं के शोर-शराबे से अलग एक जागरूक और आधुनिक जनप्रतिनिधि के रूप में पेश करती थी। युवाओं यानी 'जेन-जी' (Gen Z) के बीच उनकी पैठ का मुख्य कारण यह था कि वे केवल कागजी राजनीति नहीं करते थे, बल्कि उन रोजमर्रा की समस्याओं पर सीधा प्रहार करते थे जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। चाहे वह गिग वर्कर्स की दुश्वारियों को समझने के लिए खुद ब्लिंकिट डिलीवरी पार्टनर की ड्रेस पहनकर सड़क पर उतरना हो या फिर हवाई अड्डों पर मिलने वाले महंगे खाने और टेलीकॉम डेटा कैपिंग जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरना, राघव ने हमेशा खुद को जनता के बीच का इंसान साबित किया।
उनके इन प्रयासों का ही नतीजा था कि केंद्र सरकार को अंततः डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के लिए 10 मिनट की सख्त समय सीमा हटाने का निर्देश देना पड़ा। युवाओं को लगा था कि राघव उनकी आवाज बनकर व्यवस्था में बदलाव ला रहे हैं, लेकिन अब अचानक हुए इस हृदय परिवर्तन और पाला बदलने की घटना को यही युवा पीढ़ी एक वैचारिक विश्वासघात के तौर पर देख रही है, जिसका सीधा असर उनकी सोशल मीडिया फॉलोइंग पर साफ़ नजर आ रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राघव की यह 'कूल और रीयलिस्टिक' इमेज ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। अब उनके अचानक विचारधारा बदलने को उनके युवा वोटर्स 'अवसरवाद' की तरह देख रहे हैं, जिसका नतीजा अनफॉलो बटन दबाकर निकल रहा है।
दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी ने इस दलबदल को असंवैधानिक करार दिया है। पार्टी ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर मांग की है कि इन सातों सांसदों की सदस्यता रद्द की जाए। हालांकि, मौजूदा अंकगणित भाजपा के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है।
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