पटनाः ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के निदेशक रौशन आनंद को जमानत मिलने के बाद सोमवार को पटना में खान ग्लोबल कोचिंग सेंटर बंद रहा। कोचिंग प्रबंधन की ओर से छात्रों को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन कई छात्र संदेश नहीं देख पाए और नियमित कक्षाओं की उम्मीद में कोचिंग सेंटर पहुंच गए। कोचिंग बंद मिलने पर उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। छात्रों ने इस पूरे विवाद को जल्द समाप्त करने की मांग की है ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
कोचिंग सेंटर पहुंचे छात्र दानिश ने बताया कि उन्हें मोबाइल फोन पर भेजा गया संदेश नहीं मिल पाया क्योंकि उनका फोन बंद था। जब वे पढ़ाई के लिए संस्थान पहुंचे तो वहां कोचिंग बंद होने की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि उनके जैसे कई अन्य छात्र भी ऐसे थे, जिन्हें समय पर सूचना नहीं मिल सकी और वे कोचिंग पहुंच गए।
दानिश ने कहा कि छात्रों को यह जानकारी दी गई कि कोचिंग संस्थान को बंद क्यों रखा गया है। हालांकि छात्रों की सबसे बड़ी चिंता उनकी पढ़ाई को लेकर है। उन्होंने कहा कि विवाद की वजह से कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं और इसका सीधा असर उनके सिलेबस पर पड़ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए हर दिन महत्वपूर्ण होता है और इस तरह की परिस्थितियां उनकी तैयारी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि हम लोग तेज धूप में भी पढ़ाई के लिए यहां आते हैं, लेकिन कोचिंग बंद होने के कारण वापस लौटना पड़ा। सिलेबस लगातार पीछे होता जा रहा है। हमारी इच्छा है कि यह विवाद जल्द से जल्द समाप्त हो ताकि पढ़ाई सामान्य रूप से जारी रह सके।
छात्र दानिश ने रौशन आनंद को मिली जमानत पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रौशन आनंद को जमानत मिलना जरूरी था क्योंकि उनके परिवार में दुखद परिस्थिति है और उनके भाई का निधन हो चुका है। दानिश ने कहा कि खान सर और रौशन सर दोनों अपनी जगह अच्छे शिक्षक हैं। शिक्षकों को विवादों में नहीं पड़ना चाहिए। हम सभी छात्र चाहते हैं कि यह मामला जल्द खत्म हो और पढ़ाई का माहौल फिर से सामान्य बने।
गौरतलब है कि यह मामला चर्चित शिक्षक फैजल खान के कोचिंग संस्थान के बाहर हुई कथित फायरिंग और झड़प से जुड़ा है। घटना के बाद ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के निदेशक रौशन आनंद को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था और वे पिछले कुछ समय से जेल में थे।
सोमवार को पटना सिविल कोर्ट ने रौशन आनंद को जमानत प्रदान कर दी। उनकी ओर से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता रमाकांत शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस ने अनावश्यक रूप से गंभीर धाराएं लगाई हैं।
रमाकांत शर्मा के अनुसार, पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) को भी मामले में शामिल किया, जबकि घटना में घायल हुए व्यक्तियों को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी। उन्होंने दावा किया कि चोटें सामान्य प्रकृति की थीं और ऐसे में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा लगाना उचित नहीं था।
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