Pahalgam Terror Attack Anniversary: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले की पहली बरसी पर पूरी दुनिया ने एक स्वर में आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और भारत के साथ एकजुटता दिखाई। इस मौके पर विभिन्न देशों के डिप्लोमैटिक मिशनों और विदेशी प्रतिनिधियों ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और इस जघन्य घटना को मानवता के खिलाफ अपराध बताया।
गौरतलब है कि एक साल पहले पहलगाम में हुए इस आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा किए गए इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने पीड़ितों से उनका धर्म पूछकर उन्हें निशाना बनाया, जिसने इस घटना को और भी भयावह बना दिया। इसे हाल के वर्षों में आम नागरिकों पर हुए सबसे क्रूर हमलों में गिना जाता है। बरसी के अवसर पर भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि एक साल बाद भी इस हमले का दर्द कम नहीं हुआ है और ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ इस दुख की घड़ी में खड़ा है। उन्होंने पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इसी क्रम में भारत में ब्रिटिश उच्चायोग ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की और पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उच्चायोग ने कहा कि ब्रिटेन आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी दोहराया कि शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद जरूरी है। फ्रांस ने भी इस मौके पर भारत के साथ एकजुटता जताई। भारत में फ्रांसीसी दूतावास ने अपने संदेश में कहा कि वह यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर पीड़ितों को याद कर रहा है। फ्रांस ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अपने दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वह इस चुनौती का सामना करने में भारत का मजबूत साझेदार बना रहेगा।
इजरायल की ओर से भी इस हमले को लेकर गहरी संवेदना व्यक्त की गई। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई। उन्होंने कहा कि इजरायल आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में अडिग है और भारत के साथ मिलकर इस खतरे का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। यह घटना केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी झकझोर कर रख दिया था। पहलगाम जैसा शांत और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र इस तरह की हिंसा का शिकार बनेगा, इसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। इस हमले ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद अब भी एक वैश्विक चुनौती बना हुआ है, जिसका सामना मिलकर ही किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि दुनिया अब आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो रही है। विभिन्न देशों द्वारा एक स्वर में इस हमले की निंदा करना और भारत के प्रति समर्थन जताना इस बात का संकेत है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। पहलगाम हमले की बरसी पर दी गई ये श्रद्धांजलियां न केवल पीड़ितों की याद को जीवित रखती हैं, बल्कि यह भी संदेश देती हैं कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकता ही इसका सबसे प्रभावी जवाब है। आने वाले समय में इस तरह के सहयोग और साझेदारी से ही दुनिया को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
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