NIA Chargesheet grenade attack 2026 : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हरियाणा के सिरसा महिला पुलिस स्टेशन पर नवंबर 2025 में हुए ग्रेनेड हमले के मामले में बड़ा खुलासा करते हुए दो पाकिस्तानी नागरिकों सहित नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इस कार्रवाई ने सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क और भारत में सक्रिय उसके मॉड्यूल की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। एनआईए की जांच में सामने आया है कि यह हमला केवल एक स्थानीय आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा था, जिसका मकसद पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर देश में भय और अस्थिरता का माहौल तैयार करना था।
एनआईए द्वारा पंचकुला स्थित विशेष अदालत में दायर आरोप पत्र के अनुसार, पाकिस्तानी नागरिक शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलूच इस पूरी साजिश के मुख्य मास्टरमाइंड हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड संचार चैनलों के माध्यम से भारत में युवाओं की भर्ती कर रहे थे। इन युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर आतंकी गतिविधियों में शामिल किया गया। आरोप पत्र में जिन भारतीय नागरिकों के नाम शामिल हैं, उनमें धीरज उर्फ धीरू, विकास उर्फ विक्की, संदीप उर्फ दैमर, विकास, सुशील उर्फ सिल्लू, मोहम्मद सिजान उर्फ सिजान और गुरजंत सिंह शामिल हैं। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, धीरज उर्फ धीरू भारत में सक्रिय मॉड्यूल का प्रमुख संचालक था। वही स्थानीय गुर्गों के संपर्क में रहकर हमले की योजना और क्रियान्वयन का समन्वय कर रहा था। एनआईए ने बताया कि आरोपियों ने पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी की थी और कई संभावित लक्ष्यों पर विचार करने के बाद सिरसा महिला पुलिस स्टेशन को निशाना बनाने का फैसला किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि धीरज हमले में इस्तेमाल किए गए ग्रेनेड को हासिल करने के लिए अमृतसर गया था, जहां उसने आरोपी गुरजंत सिंह से विस्फोटक सामग्री प्राप्त की। इसके बाद पूरी टीम ने सुनियोजित तरीके से 25 नवंबर 2025 को हमला अंजाम दिया।
एनआईए की जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। आरोपियों ने ग्रेनेड हमले की पूरी घटना को मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसका उद्देश्य वीडियो को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर दहशत फैलाना और आतंकी संगठन की ताकत का प्रचार करना था। जांच में यह भी पता चला है कि हमले के बाद भी आरोपी लगातार अपने पाकिस्तानी हैंडलरों और उनके सहयोगियों के संपर्क में बने हुए थे। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच से भर्ती, फंडिंग, विस्फोटकों की खरीद और ऑपरेशनल समन्वय की पूरी श्रृंखला का खुलासा हुआ है।
एनआईए ने कहा है कि मामले में अभी जांच जारी है और विदेशी कनेक्शन, वित्तीय चैनलों तथा अन्य सहयोगियों की भूमिका को लेकर गहन पड़ताल की जा रही है। एजेंसी ने कई डिजिटल, फोरेंसिक और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए हैं, जिनके आधार पर नेटवर्क के और बड़े खुलासे होने की संभावना है। साथ ही फरार आरोपियों की तलाश के लिए विभिन्न राज्यों में छापेमारी और निगरानी अभियान भी चलाए जा रहे हैं। एजेंसी का मानना है कि यह मॉड्यूल सीमा पार बैठे आतंकियों के निर्देश पर लंबे समय से सक्रिय था और भविष्य में भी बड़े हमलों की योजना बना रहा था।
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