Narco-Coordination Centre meet : अमित शाह फूंकेंगे नशे के सौदागरों के खिलाफ महायुद्ध का बिगुल, 6000 करोड़ का ड्रग्स होगा स्वाहा, जम्मू और गुवाहाटी में कसी जाएगी नकेल!
खबर सार :-
Narco-Coordination Centre meet : केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह 26 जून को दिल्ली में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर की अहम बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान जम्मू और गुवाहाटी के नए एनसीबी दफ्तरों का उद्घाटन होगा और 6000 करोड़ रुपये का ड्रग्स नष्ट किया जाएगा।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: देश से नशे के काले कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए मोदी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'नशामुक्त भारत' के संकल्प को पूरा करने के लिए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आगामी 26 जून को देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की कमान संभालने जा रहे हैं। गृह मंत्री शाह यहाँ Narco-Coordination Centre meet (नार्को-coordination सेंटर मीट) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा आयोजित की जा रही इस महाबैठक में देश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ी तमाम बड़ी एजेंसियां एक मंच पर होंगी।
यह बैठक इसलिए भी खास होने वाली है क्योंकि इसमें हाइब्रिड तरीके से केंद्र सरकार के 44 मंत्रालयों और विभागों के आला अधिकारी शामिल होंगे। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों की सरकारों और मादक पदार्थ रोधी कानून लागू करने वाली एजेंसियों के 108 शीर्ष प्रतिनिधि भी इस Narco-Coordination Centre meet (नार्को-coordination सेंटर मीट) का हिस्सा बनेंगे, ताकि देश को खोखला कर रहे ड्रग माफियाओं के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
सामने आएगा 3 साल का महाप्लान: जारी होगा विजन डॉक्यूमेंट
इस ऐतिहासिक मौके पर गृह मंत्री अमित शाह देश के सामने 'मादक पदार्थ नियंत्रण पर विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)' (Vision Document) पेश करेंगे। केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और ड्रग्स पर लगाम लगाने वाली एजेंसियों से लंबी बातचीत के बाद तैयार किया गया यह रोडमैप आने वाले तीन सालों के लिए देश की रणनीति तय करेगा। इस नई नीति में मुख्य रूप से तीन मोर्चों पर काम होगा- बाजार में ड्रग्स की मांग को कम करना, इसकी सप्लाई को काटना और नशे से होने वाले नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाना।
आज के डिजिटल दौर में नशे के सौदागरों ने पैर पसारने के लिए नए रास्ते चुन लिए हैं। यही वजह है कि इस Narco-Coordination Centre meet (नार्को-coordination सेंटर मीट) में अगले तीन वर्षों के दौरान सिंथेटिक ड्रग्स (Synthetic Drugs) और डार्कनेट (Darknet) के रास्ते होने वाली तस्करी से निपटने पर विशेष फोकस किया गया है। सरकार की योजना युवाओं को इस दलदल से बचाने और नशे की लत का शिकार हो चुके लोगों के इलाज व पुनर्वास केंद्रों (Rehabilitation Centers) की पहुंच को गांव-गांव तक बढ़ाने की है। इस नीति में साफ कर दिया गया है कि किस एजेंसी की क्या जिम्मेदारी होगी और किस तय समय सीमा के भीतर काम को अंजाम देना होगा।
जम्मू और गुवाहाटी को मिलेंगे नए जोनल ऑफिस, कांपेंगे तस्कर
देश के सीमावर्ती इलाकों में नशे की खेप को रोकने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में अमित शाह जम्मू और गुवाहाटी में बनकर तैयार हुए एनसीबी के नए आंचलिक कार्यालयों (Regional Offices) का उद्घाटन करेंगे। इन दोनों संवेदनशील इलाकों में नए जोनल दफ्तर खुलने से पूर्वोत्तर और उत्तर भारत में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय तस्करों पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। इसके साथ ही कार्यक्रम में एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट-2025 (NCB Annual Report) भी देश के सामने रखी जाएगी।
फूंक दिया जाएगा 6 हजार करोड़ का जहर
इस Narco-Coordination Centre meet (नार्को-coordination सेंटर मीट) के दौरान एक और सबसे बड़ा एक्शन देखने को मिलेगा। सरकार ने देशव्यापी स्तर पर 'ड्रग डिस्पोजल फोर्टनाइट कैंपेन' (Drug Disposal Fortnight Campaign) यानी नशीले पदार्थों को नष्ट करने का एक विशेष अभियान चलाया हुआ है। इस पखवाड़े के तहत देशभर की केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से करीब 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को पूरी तरह नष्ट किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस जब्त किए गए नशे की कीमत तकरीबन 6,000 करोड़ रुपए आंकी गई है। इतनी भारी मात्रा में जहर को जलाकर खाक करना सरकार के सख्त इरादों को बयां करता है।
'जीरो टॉलरेंस' नीति पर मुहर
यह उच्च स्तरीय बैठक इस बात का गवाह बनेगी कि कैसे देश की तमाम एजेंसियां आपसी तालमेल से काम कर रही हैं। सरकार ने साफ किया है कि नशे की समस्या से सिर्फ एक विभाग अकेले नहीं लड़ सकता, इसके लिए 'हॉल-ऑफ-गवर्नमेंट अप्रोच' (Whole of Government Approach ) यानी पूरी सरकार को एक होकर काम करना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ जो 'जीरो टॉलरेंस नीति' (Zero Tolerance Policy) रही है, यह Narco-Coordination Centre meet (नार्को-coordination सेंटर मीट) उसे जमीन पर उतारने और आगामी तीन सालों के भीतर देश को ड्रग्स मुक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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