Muzaffarpur hospital fire accident live updates : देश अभी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में लगी भयावह आग के सदमे से उबरा भी नहीं था कि बिहार के मुजफ्फरपुर से एक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आ गई है। यहाँ ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू (ICU) वार्ड में गुरुवार (4 जून) की तड़के सुबह भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 10 से अधिक मरीजों की दम घुटने और झुलसने से मौत हो गई है। अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर जब यह हादसा हुआ, उस समय मरीज गहरी नींद में थे। देखते ही देखते पूरा परिसर काले और जहरीले धुएं के गुबार में तब्दील हो गया।
घटना गुरुवार सुबह करीब 3:00 बजे की है। अस्पताल के पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू वार्ड से अचानक धुएं का तेज गुबार उठने लगा। जब तक लोग कुछ समझ पाते, आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मुजफ्फरपुर अस्पताल में आग लगते ही पूरे परिसर में कोहराम मच गया। तीमारदार अपने मरीजों को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन जहरीले धुएं के कारण वार्ड में दाखिल होना नामुमकिन हो गया था। शुरुआती जांच में इस भीषण अग्निकांड की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
हादसे की भयावहता को देखते हुए दमकल विभाग की करीब एक दर्जन (12) गाड़ियों को तुरंत मौके पर रवाना किया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने भारी मशक्कत के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया। चूंकि आईसीयू वार्ड पूरी तरह धुएं से पैक हो चुका था, इसलिए दमकल कर्मियों ने खिड़कियों के शीशे और दरवाजे तोड़कर वेंटिलेशन बनाया और मरीजों को बाहर निकालना शुरू किया। अग्निशमन पदाधिकारी आर.एन. पांडेय ने बताया, "हमें सुबह करीब 3 बजे मुजफ्फरपुर अस्पताल में आग लगने की सूचना मिली थी। जब हमारी टीम मौके पर पहुंची, तो स्थिति बेहद भयावह थी। पूरा आईसीयू वार्ड घने और काले धुएं से भरा हुआ था। हमारी टीम ने जान पर खेलकर 20 से ज्यादा मरीजों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है, लेकिन दुर्भाग्यवश 10 लोगों की मौत की सूचना है।"
इस त्रासदी के बीच अस्पताल प्रशासन की घोर संवेदनहीनता और लापरवाही भी उजागर हुई है। हादसे के बाद अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। परिजनों का आरोप है कि जैसे ही आईसीयू में आग भड़की, अस्पताल के डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों को तड़पता हुआ छोड़कर खुद अपनी जान बचाकर मौके से फरार हो गए।
एक पीड़ित परिजन ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि उनके पिता आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, लेकिन इस मुजफ्फरपुर अस्पताल में आग ने उनकी जान ले ली। उन्होंने आरोप लगाया कि भागते समय अस्पताल कर्मियों ने गंभीर मरीजों को बाहर निकालने की कोई कोशिश नहीं की। यहाँ तक कि हादसे के बाद मृत मरीजों के शव तक परिजनों को सौंपने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां मौजूद नहीं था। अग्निशमन अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अस्पताल का स्टाफ नदारद था।
दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से जिन 20 से अधिक मरीजों को बाहर निकाला गया, उन्हें तुरंत शहर के दूसरे सुरक्षित अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया गया है। बचाए गए मरीजों में से कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, क्योंकि वे काफी देर तक जहरीले धुएं के संपर्क में रहे और उनके फेफड़ों में कार्बन जमा हो गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, कई मरीज गंभीर रूप से झुलस भी गए हैं, जिसके कारण मुजफ्फरपुर अस्पताल में आग से होने वाली मौतों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर डटी हुई हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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