LPG cylinder price hike: एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर सियासी घमासान, भाजपा ने कहा- दुनिया में सबसे सस्ती रसोई गैस..

खबर सार :-
बीजेपी ने दावा किया कि फरवरी के बाद से वैश्विक एलपीजी कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके पीछे पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े व्यवधान प्रमुख कारण बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रयास जारी रखा है।
LPG cylinder price hike: एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर सियासी घमासान, भाजपा ने कहा- दुनिया में सबसे सस्ती रसोई गैस..
खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। जहां विपक्ष ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि को आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ बताया है, वहीं भाजपा का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद भारत में रसोई गैस दुनिया के कई देशों की तुलना में अभी भी काफी सस्ती उपलब्ध है।

बीजेपी ने दिया विपक्ष को जवाब

भाजपा ने रविवार को विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की वास्तविक लागत से काफी कम कीमत पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ डालने के बजाय लागत का बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही हैं।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि हर बार एलपीजी की कीमतों में मामूली बदलाव होने पर विपक्ष शोर मचाने लगता है, लेकिन वह यह तथ्य छिपाता है कि भारतीय परिवारों को दुनिया में सबसे कम कीमतों पर रसोई गैस मिल रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रयास किया है।

बीजेपी ने अन्य देशों से की भारत की तुलना

मालवीय के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर प्रभावी रूप से 642 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए इसकी कीमत 942 रुपये है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की आपूर्ति लागत 1600 रुपये से अधिक पहुंच चुकी है, ऐसे में उपभोक्ताओं को वास्तविक लागत से काफी कम दर पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है।

भाजपा नेता ने विभिन्न देशों में एलपीजी की कीमतों की तुलना भी पेश की। उनके अनुसार पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 1046 रुपये, नेपाल में 1207 रुपये, बांग्लादेश में 1225 रुपये और श्रीलंका में 1241 रुपये है। वहीं विकसित देशों की बात करें तो अमेरिका में इसकी कीमत लगभग 1755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया में 1765 रुपये और कनाडा में 2411 रुपये तक पहुंचती है। भाजपा का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में एलपीजी अपेक्षाकृत सस्ती है।

भाजपा का यह भी दावा है कि तेल विपणन कंपनियों की ‘अंडर-रिकवरी’ यानी लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पार्टी के अनुसार यह बोझ सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां उठा रही हैं ताकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।

कांग्रेस और सपा ने बोला जोरदार हमला

दूसरी ओर विपक्ष ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने इसे महंगाई बढ़ाने वाला फैसला बताया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि जब सरकारी तेल कंपनियां हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमा रही हैं तो फिर गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी।

तिवारी ने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी तेल कंपनियों ने 77 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लाभ अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियां लाभ में हैं तो सरकार को आम जनता को राहत देनी चाहिए, न कि महंगाई का अतिरिक्त बोझ डालना चाहिए।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर शायराना अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “रोटी के महंगे होने से थाली गई रूठ, भाजपा से अब तो, हर आस गई टूट।” उनके इस बयान को सरकार की आर्थिक नीतियों पर तंज के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि आम परिवारों के लिए चिंता का विषय है। पार्टी ने आरोप लगाया कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और इसका असर सीधे आम नागरिकों की रसोई पर पड़ रहा है।

एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर जारी यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि महंगाई और घरेलू खर्च का मुद्दा हमेशा से जनता के लिए संवेदनशील रहा है। भाजपा जहां इसे वैश्विक परिस्थितियों से जोड़कर उचित ठहरा रही है, वहीं विपक्ष इसे आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव का उदाहरण बताकर सरकार को घेरने में जुटा हुआ है।

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