झांसीः महानगर में बिजली विभाग द्वारा प्रीपेड मीटर लगाने के बाद उपभोक्ताओं और विभाग के बीच विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। विभाग का दावा है कि उन्होंने उपभोक्ताओं को सभी जानकारी उपलब्ध कराई है और इसके लिए एक ऐप भी विकसित किया गया है, जिसे अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से डाउनलोड करना होता है। इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपने विद्युत खर्च, बैलेंस और पेमेंट संबंधी पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि ऐप कभी-कभी काम नहीं करता और इसी वजह से उनकी बिजली अनावश्यक रूप से कट जाती है। इससे घरों में परेशानियां बढ़ रही हैं। विभागीय अधिकारी भी हर मामले को पूर्ण रूप से हल नहीं कर पाते, जिससे विवाद और बढ़ता जा रहा है।
हाल ही में नेगेटिव बैलेंस के कारण महानगर के लगभग 8000 उपभोक्ताओं की बिजली कट गई। इससे आक्रोशित उपभोक्ता सुकवा ढूकवा कॉलोनी स्थित विभागीय कार्यालय पहुंचे और जमकर हंगामा किया। कार्यालय में अधिकारियों ने उपभोक्ताओं के बिलों की जांच की। उपभोक्ताओं का आरोप था कि उन्होंने एडवांस भुगतान किया था, फिर भी उनकी बिजली काट दी गई।
जांच में पाया गया कि इन उपभोक्ताओं के प्रीपेड मीटर का बैलेंस नेगेटिव हो गया था। लगभग दो घंटे तक कार्यालय में आपाधापी का माहौल रहा, लेकिन अधिकारियों ने एक-एक कर उपभोक्ताओं की समस्या सुनी और उसका समाधान किया।
अधिशासी अभियंता रवींद्र कुमार ने कहा कि उपभोक्ता अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से विभागीय ऐप जरूर डाउनलोड करें और इसकी सुविधाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को हमेशा अपने प्रीपेड मीटर में एडवांस बैलेंस बनाए रखना चाहिए।
रवींद्र कुमार ने बताया कि नेगेटिव बैलेंस वाले प्रीपेड मीटर से बिजली स्वतः ही डिस्कनेक्ट हो जाती है। बिजली कटने पर उपभोक्ता मीटर में लगे काले रंग के पुश बटन को दबाकर 24 घंटे का ग्रेस पीरियड प्राप्त कर सकते हैं और बिजली तुरंत चालू हो जाती है। हालांकि, इस सुविधा का उपभोक्ता माह में केवल एक बार ही लाभ ले सकता है।
इसके अतिरिक्त, विभाग ने यह व्यवस्था भी की है कि साप्ताहिक या सार्वजनिक अवकाशों के दिनों में शाम 6:00 से 8:00 बजे के बीच बिजली नहीं काटी जाएगी। उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर संचालन में आने वाली किसी भी समस्या के लिए हेल्प डेस्क से संपर्क करने की सुविधा भी दी गई है।
इस तरह, विभाग ने उपभोक्ताओं को परेशानियों से बचाने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन लगातार तकनीकी खामियों और जागरूकता की कमी के कारण विवाद लगातार बने हुए हैं।
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