US Vs Iran War: अमेरिका और ईरान (US vs iran) के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर एक और मुसीबत खड़ी कर दी है। पेट्रोल, डीजल से लेकर गैस की महामारी के बीच ईरान ग्लोबल नेटवर्क को निशाना बनाने की फिराक में है। सीएनए और ईरान के सरकारी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तेहरान, होर्मुज के समुद्री जलमार्ग के नीचे से गुजरने वाली समुद्र तटीय इंटरनेट केबलों (Cable) पर फीस लगाने की योजना बना रही है।
इंटरनेट प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें सबसे ज्यादा माइक्रोसॉफ्ट, व्हाट्सऐप, ऑनलाइन होम डिलीवरी की सुविधा, इंस्टाग्राम रील्स, गूगल सर्च और ऑनलाइन ओटीटी जैसे बड़े प्लेटफार्म प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिका-इजराइस और ईरान के बीच बढ़ते आपसी तनाव से ग्लोबल लेवल पर लोगों को ईंधन की बढ़ती कीमतों की मार झेलनी पड़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल मार्गों के इस्तेमाल को अपना हथियार बनाने के बाद अब ईरान ग्लोबल नेटवर्क को अपना अगला निशाना बनाने की फिराक में है। सीएए और ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान होर्मुज समुद्री जलमार्ग के नीचे से गुजरने वाले समुद्र तटीय इंटरनेट केबलों (Cable) पर ईरान फीस लगाने की फिराक में है।
इस खबर को ज्यादा जोर ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी द्वारा किए गए एक पोस्ट से मिल रहा है। अपने एक्स पर लिखा है कि वे इंटरनेट केबलों पर फीस लगाएंगे। इसके बाद ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से संबंधित सरकारी मीडिया के मुताबिक समुद्र के नीचे के केबलों (Cable) के ऑपरेटरों को ईरान के कानून मानने होंगें और लाइसेंस शुल्क भी देना पड़ेगा। इसके साथ ही केबलों में किसी तरह की दिक्कत को ईरानी कंपनियों द्वारा ही संचालित किया जाएगा।
ईरान के सरकारी मीडिया के द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया को बड़े स्तर पर जोड़ने वाले इंटरनेट केबलों (Cable) को एक ही समय पर क्षति पहुंचाई गई तो बड़े स्तर पर इंटरनेट ठप हो सकता है, जिससे इंटरनेट की दुनिया को भारी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। TeleGeography के रिसर्च डायरेक्टर एलन मौल्डिन से मिली जानकारी के अनुसार कई अंतरराष्ट्रीय केबल ऑपरेटरों ने इस तरह की बड़ी मुसीबत से बचने के कारण ईरानी जलक्षेत्र से दूरी बना ली है। अब ज्यादातर केबल को ओमान के रास्ते से गुजारा जा रहा है।
समुद्र के नीचे बिछी केबल (Cable) से 99 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय डेटा एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचता है। भारत, एशिया और यूरोप के बीच इंटरनेट की सुविधा पहुंचाने का मुख्य स्रोत माना जाता है। इसलिए किसी भी तरह की बाधा होने पर इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है यह कुछ समय के लिए बाधित हो सकता है।
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