Visa नियमों में बड़ा बदलाव: अब 180 दिन पूरे होने से पहले कराना होगा पंजीकरण, केंद्र ने अधिसूचित किए नए आप्रवास नियम

खबर सार :-
केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ‘आप्रवास और विदेशियों विषयक नियम-2026’ विदेशी नागरिकों के पंजीकरण, नागरिकता संबंधी मामलों और अपील व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। नए प्रावधान समयबद्ध पंजीकरण, डिजिटल प्रक्रिया और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था को बढ़ावा देंगे। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ने के साथ-साथ विदेशियों और संबंधित परिवारों को भी स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे।
Visa नियमों में बड़ा बदलाव: अब 180 दिन पूरे होने से पहले कराना होगा पंजीकरण, केंद्र ने अधिसूचित किए नए आप्रवास नियम
खबर विस्तार : -

India Immigration Reforms 2026: केंद्र सरकार ने आप्रवास और विदेशियों से संबंधित नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए नई अधिसूचना जारी कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा 1 जून को राजपत्र में प्रकाशित ‘आप्रवास और विदेशियों विषयक नियम-2026’ तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। नए नियमों का उद्देश्य विदेशी नागरिकों के पंजीकरण तंत्र को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। इसके साथ ही भारतीय नागरिकता से जुड़े कुछ विशेष मामलों तथा अपील व्यवस्था में भी अहम संशोधन किए गए हैं।

नए नियमों के अनुसार, भारत में 180 दिनों तक के वीजा पर आने वाले विदेशी नागरिकों को यदि अपना प्रवास बढ़ाना है तो उन्हें वीजा अवधि समाप्त होने से पहले ही पंजीकरण कराना होगा। यह बदलाव पहले की व्यवस्था से अलग है, जिसमें विदेशी नागरिकों को 180 दिन पूरे होने के बाद 14 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने की अनुमति थी।

समय रहते पंजीकरण कराना होगा अनिवार्य

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब विदेशी नागरिक भारत में आगमन के बाद 180 दिन पूरे होने से पहले किसी भी समय अपना पंजीकरण करा सकते हैं। यह कदम प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और विदेशी नागरिकों के रिकॉर्ड को समय पर अद्यतन रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। यदि कोई विदेशी नागरिक निर्धारित समयसीमा के भीतर पंजीकरण नहीं कराता है तो बाद में उसका आवेदन केवल विशेष परिस्थितियों में ही स्वीकार किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विलंबित पंजीकरण की अनुमति केवल आपातकालीन मामलों में ही दी जाएगी। इससे पंजीकरण प्रक्रिया में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय माता-पिता वाले बच्चों को मिली राहत

संशोधित नियमों में ऐसे बच्चों के लिए विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं जो भारतीय और विदेशी, दोनों नागरिकताओं का दावा करने की स्थिति में हैं। गृह मंत्रालय ने कहा है कि यदि माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक है और वह ‘नागरिकता अधिनियम-1955’ की धारा 3 के तहत बच्चे की भारतीय नागरिकता बनाए रखना चाहता है, तो ऐसे मामलों में पंजीकरण की अनिवार्यता लागू नहीं होगी। यह प्रावधान उन परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जो अंतरराष्ट्रीय विवाह या दोहरी नागरिकता से जुड़े कानूनी मामलों का सामना करते हैं। इससे नागरिकता संबंधी प्रक्रियाओं में स्पष्टता आएगी और अनावश्यक प्रशासनिक जटिलताओं को कम किया जा सकेगा।

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विदेशी नागरिकता मिलने पर 30 दिन में देनी होगी सूचना

नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि भारत में रह रहा कोई बच्चा बाद में किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसके माता-पिता में से किसी एक को इस परिवर्तन की जानकारी संबंधित पंजीकरण अधिकारी को देनी होगी। सरकार ने इसके लिए 30 दिनों की समयसीमा निर्धारित की है। विदेशी नागरिकता प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर सूचना देना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन रखना और कानूनी स्थिति को स्पष्ट बनाए रखना है।

रिपोर्टिंग समय-सीमा के प्रावधान में भी सुधार

गृह मंत्रालय ने नियम 18 के तहत रिपोर्टिंग अवधि से जुड़े एक तकनीकी प्रावधान में भी संशोधन किया है। अधिसूचना में ‘लेकिन 24 घंटे से अधिक’ वाक्यांश को बदलकर ‘लेकिन चौबीस घंटे से अधिक नहीं’ किया गया है। यह बदलाव भाषा की स्पष्टता और कानूनी व्याख्या में संभावित भ्रम को दूर करने के लिए किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण संशोधन नियमों की बेहतर समझ और प्रभावी क्रियान्वयन में मदद करेंगे।

अपील प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन, 60 दिन में होगा निस्तारण

नए नियमों के तहत अपील व्यवस्था को भी आधुनिक और डिजिटल स्वरूप दिया गया है। अब यदि किसी मालिक, संरक्षक या संबंधित पक्ष को नागरिक अधिकारियों द्वारा जारी किसी निर्देश पर आपत्ति है, तो वह ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त के समक्ष अपील कर सकेगा। हालांकि, इसके लिए अपील निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही दाखिल करनी होगी और इसे आदेश जारी होने के 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आयुक्त संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के बाद कारणयुक्त आदेश जारी करेंगे। साथ ही, अपील प्राप्त होने की तारीख से सामान्यतः 60 दिनों के भीतर मामले के निस्तारण का प्रयास किया जाएगा।

 

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