नई दिल्ली : देश के बड़े हिस्से में सूरज की तपिश और लू (Heatwave) ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक पारा 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर रहा है। लेकिन इस भीषण प्रचंड गर्मी के बीच मौसम विभाग और वैश्विक मौसम मॉडलों ने एक ऐसी खबर दी है, जो झुलसते भारत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। ताज़ा पूर्वानुमानों के अनुसार, साल 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) अपने निर्धारित समय से पहले भारतीय तटों पर दस्तक दे सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संकेत बताते हैं कि मई के अंत तक देश के दक्षिणी राज्यों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा।
अप्रैल के महीने से ही उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में जिस तरह से गर्मी ने अपने तेवर दिखाए हैं, उसने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में तापमान 43-44 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा है। IMD ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में हीटवेव का प्रकोप अभी और बढ़ेगा।
हालांकि, इस बीच 'यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट' (ECMWF) के आंकड़े राहत की कहानी बुन रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल समुद्री हवाओं का रुख उम्मीद से पहले सक्रिय हो रहा है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो मानसून 25 मई के आसपास ही केरल के तट पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है, जो सामान्यतः 1 जून को पहुँचता है।
मानसून की यात्रा का पहला पड़ाव अंडमान और निकोबार द्वीप समूह होता है। ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरें और वेदर मॉडल इशारा कर रहे हैं कि 18 से 25 मई के बीच अंडमान सागर में मानसून की सक्रियता बढ़ जाएगी। हिंद महासागर से उठने वाली नमी युक्त हवाएं बंगाल की खाड़ी की ओर तेज़ी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंडमान के उत्तर में एक ट्रॉपिकल सिस्टम बनने की 20 से 40 प्रतिशत संभावना है। मौसम विज्ञान की भाषा में यह सिस्टम एक 'मैग्नेट' की तरह काम करता है, जो नमी को सोखकर उसे मुख्य भूमि की ओर धकेलता है। इससे न केवल बारिश की तीव्रता बढ़ती है, बल्कि मानसून की रफ़्तार को भी गति मिलती है। अनुमान है कि इस दौरान अंडमान के इलाकों में सामान्य से 30 से 60 मिलीमीटर अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है।
इस साल मानसून के जल्दी और मज़बूत होने के पीछे इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
क्या है पॉजिटिव IOD?: जब हिंद महासागर का पश्चिमी हिस्सा (अफ्रीका के करीब) पूर्वी हिस्से (इंडोनेशिया के करीब) की तुलना में अधिक गर्म होता है, तो इसे 'पॉजिटिव IOD' कहा जाता है।
असर: यह स्थिति भारत के लिए वरदान साबित होती है क्योंकि यह मानसूनी हवाओं को अतिरिक्त ऊर्जा और नमी प्रदान करती है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार, IOD की स्थिति फिलहाल मानसून के पक्ष में झुकती नज़र आ रही है।
इसके अलावा, अप्रैल और मई में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी भी समुद्र से उठने वाली हवाओं को ज़मीन की ओर खींचने में मदद कर रही है। भूमि का तापमान जितना अधिक होगा, उतना ही कम दबाव (Low Pressure) का क्षेत्र बनेगा, जो मानसूनी बादलों को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के किसानों के लिए मानसून का जल्दी आना किसी उत्सव से कम नहीं है। भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था आज भी काफी हद तक बारिश के पानी पर टिकी है।
1. जलाशयों का पुनर्भरण: समय से पहले बारिश होने से दक्षिण भारत के सूखते जलाशयों में पानी का स्तर सुधरेगा।
2. खरीफ की बुवाई: मानसून की जल्दी दस्तक से किसान खरीफ की फसलों की तैयारी समय रहते कर सकेंगे।
3. बिजली की मांग में कमी: बारिश होने से तापमान गिरेगा, जिससे एयर कंडीशनिंग और सिंचाई पंपों के लिए बिजली की भारी खपत में कमी आएगी।
25 मई से 1 जून के बीच का समय बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दौरान दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं के तेज़ होने की संभावना है। ये हवाएं सीधे केरल और तमिलनाडु के दक्षिणी छोर से टकराएंगी। मौसम विभाग की मानें तो शुरुआती दौर में ही इन राज्यों में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है। हालांकि मानसून की आहट ने खुशियों की उम्मीद जगा दी है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यदि चक्रवाती सिस्टम या वायुमंडलीय दबाव में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है, तो 2026 का मानसून भारत के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगा।
फिलहाल, उत्तर भारत को अभी कुछ हफ़्तों तक सूरज की तपिश झेलनी होगी, लेकिन दक्षिण से आ रही ठंडी हवाओं के संकेत बता रहे हैं कि इंतज़ार अब ज़्यादा लंबा नहीं है। प्रशासन को चाहिए कि वह मानसून से पहले की तैयारियों, जैसे नालों की सफाई और आपदा प्रबंधन की समीक्षा, समय से पहले पूरी कर ले ताकि 'वक्त से पहले' आ रही इस बारिश का स्वागत बिना किसी नुकसान के किया जा सके।
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