हिमालय की हरियाली पर खतरा, 2 साल में 2.27% ग्रीन कवर घटा

खबर सार :-
भारतीय हिमालयी इलाकों में पिछले दो वर्षों के दौरान 2.27% ट्री कवर कमी आई है। केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में रिपोर्ट पेश करते हुए इस बात पर चिंता जताई है।

हिमालय की हरियाली पर खतरा, 2 साल में 2.27% ग्रीन कवर घटा
खबर विस्तार : -

Himalaya Green Cover report: भारतीय हिमालयी इलाकों में पिछले दो वर्षों के दौरान 2.27% ट्री कवर कम हुआ है। हालांकि राहत की बात यह रही की जंगल में कार्बन स्टॉक में हल्की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, जिसे पर्यावरणय के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में रिपोर्ट पेश करते हुए इस बात पर चिंता जताई है।

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट की रिपोर्ट

पर्यावरण को लेकर आई नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राजसभा में कहा कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र में 2021 से 2023 के बीच ट्री कवर में 2.27 की कमी दर्ज की गई है।राजसभा में शुक्रवार को एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय मंत्री ने "इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट'' रिपोर्ट (ISRF) 2023 के आंकड़े साझा किए। रिपोर्ट के अनुसार 2021 में ट्री  कवर 15,427.11 वर्ग किमी से घटकर 15,075.5 वर्ग किलोमीटर रह गया है।

आंकड़ों में भारी गिरावट के साथ कार्बन स्टॉक में इजाफा

ये आंकड़े साफ़ संकेत देते हैं कि महज दो वर्षों में हिमालयी क्षेत्र की हरियाली तेजी से घटी है। इस इलाके में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तर पूर्वी राज्यों सहित कुल 13 राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश शामिल हैं।जहां एक ओर पेड़ों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, वहीं जंगलों के कुल कार्बन स्टॉक में हल्की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। 2021 में यह आंकड़ा 3,272.68 मिलियन टन था, जो 2023 में बढ़कर 3,273.10 मिलियन टन पहुंच गया है। कार्बन स्टॉक में इजाफा पर्यावरण के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है। क्योंकि यह वातावरण से कार्बन अवशोषित करने की क्षमता को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि जंगलों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए केवल पेड़ों की हरियाली काफी नहीं है। इसके पीछे कई पारिस्थितिक और जैविक मानक अहम भूमिका निभाते हैं।

भारतीय वन सर्वेक्षण स्थिति का आंकलन

भारतीय वन सर्वेक्षण जंगलों की स्थिति जानने के लिए विस्तृत अध्ययन करता है। इस प्रक्रिया में मिट्टी की गहराई, मिट्टी के कटाव, वनस्पति की प्रकृति और जंगलों को होने वाले नुकसान जैसे पहलुओं पर डेटा जुटाया गया, जिससे वन क्षेत्र की वास्तविक हालत का आंकलन किया जाता है।

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