Election Commission Silence Period : आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मीडिया संस्थानों और राजनीतिक दलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मतदान से पहले निर्धारित ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान किसी भी प्रकार के चुनावी प्रचार, बहस, विश्लेषण या मतदाताओं को प्रभावित करने वाली सामग्री का प्रसारण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
आयोग के अनुसार, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126(1)(बी) के तहत मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले ‘साइलेंस पीरियड’ लागू हो जाता है। इस अवधि में टीवी, रेडियो, डिजिटल प्लेटफॉर्म या किसी अन्य माध्यम से ऐसी कोई सामग्री प्रसारित नहीं की जा सकती, जो मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करे।
गौरतलब है कि 15 मार्च को आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के साथ-साथ गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड और त्रिपुरा की 8 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की थी। इन सभी राज्यों में अलग-अलग चरणों में मतदान होना है, जिसके अनुसार साइलेंस पीरियड की समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। असम में 9 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है, जिसके लिए साइलेंस पीरियड 7 अप्रैल शाम 5 बजे से 9 अप्रैल शाम 5 बजे तक लागू रहेगा। वहीं, केरल और पुडुचेरी में भी 9 अप्रैल को मतदान होगा, जहां 7 अप्रैल शाम 6 बजे से 9 अप्रैल शाम 6 बजे तक यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा और यहां साइलेंस पीरियड 21 अप्रैल शाम 6 बजे से 23 अप्रैल शाम 6 बजे तक लागू रहेगा। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होना है-पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को। पहले चरण के लिए साइलेंस पीरियड 21 अप्रैल शाम 6 बजे से 23 अप्रैल शाम 6 बजे तक और दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल शाम 6 बजे से 29 अप्रैल शाम 6 बजे तक प्रभावी रहेगा।
चुनाव आयोग ने मीडिया संगठनों को विशेष रूप से निर्देश दिया है कि इस दौरान प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक अपील, विश्लेषण या ऐसी चर्चा शामिल न हो, जो किसी पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में माहौल बना सके। इसमें ओपिनियन पोल और चुनावी विश्लेषण भी शामिल हैं। इसके अलावा, आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126ए के तहत एग्जिट पोल पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया है। 9 अप्रैल सुबह 7 बजे से लेकर 29 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक किसी भी प्रकार का एग्जिट पोल करना, प्रकाशित करना या प्रसारित करना पूरी तरह वर्जित रहेगा।
आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें दो साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों शामिल हो सकते हैं। आयोग ने सभी मीडिया संस्थानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। चुनाव आयोग का यह कदम निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइलेंस पीरियड के दौरान प्रचार पर रोक लगाने से मतदाताओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से निर्णय लेने का अवसर मिलता है, जिससे लोकतंत्र मजबूत होता है।
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