तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़, DRI ने जब्त की 60 हजार किलोग्राम विदेशी सुपारी, 5 गिरफ्तार

खबर सार :-
डीआरआई ने तस्करी रोकने के लिए दो बड़े अभियान चलाए। इस दौरान 60 हजार किलोग्राम विदेशी सुपारी जब्त करने में सफलता मिली है। इस मामले में 5 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़, DRI ने जब्त की 60 हजार किलोग्राम विदेशी सुपारी, 5 गिरफ्तार
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: पूर्वोत्तर क्षेत्र में तस्करी के नेटवर्क पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने विदेशी मूल की 60,000 किलोग्राम सुपारी जब्त की है और साथ ही, इस मामले के संबंध में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह जानकारी शुक्रवार को वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई।

डीआरआई की गुवाहाटी क्षेत्रीय इकाई ने पूवोत्तर क्षेत्र में कल और इस सप्ताह की शुरुआत में संचालित किए गए दो बड़े अभियानों में करीब 60 हजार किलोग्राम तस्करी की गई विदेशी सुपारी जब्त की है। DRI ने विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर मिजोरम और असम में अभियान चलाकर ये जब्तियां कीं।

म्यांमार से लाई जा रही सुपारी

डीआरआई ने बयान में आगे कहा गया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि ये विदेशी सूखी सुपारियां म्यांमार-मिजोरम सीमा मार्ग के जरिए म्यांमार से भारत में तस्करी करके लाई जा रही थीं। इस अभियान के दौरान DRI को असम राइफल्स की 38वीं बटालियन से सहायता मिली। अब तक, इन अभियानों के संबंध में 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मंत्रालय ने आगे कहा कि पड़ोसी देश से सुपारी का अवैध प्रवाह घरेलू सुपारी उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर रहा है। इससे पहले, DRI ने देश में सक्रिय ई-सिगरेट तस्करी गिरोहों पर एक बड़ी कार्रवाई की थी, जिसमें 120 करोड़ रुपये मूल्य की 3 लाख ई-सिगरेट/वेप जब्त किए गए थे।

कई राज्यों में पकड़ी तस्करी

अपने बयान में, वित्त मंत्रालय ने बताया कि राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने प्रतिबंधित निकोटीन उत्पादों के अवैध आयात के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के विभिन्न बंदरगाहों, हवाई अड्डों और ICDs (अंतर्देशीय कंटेनर डिपो) पर चलाए गए अभियानों के माध्यम से ई-सिगरेट (वेप) तस्करी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। ये प्रतिबंधित ई-सिगरेट लगातार चीन से मंगाई जा रही थीं और इन्हें अन्य सामानों, जैसे "फर्नीचर" और "धातु की कुर्सी के पुर्ज़ों" की खेप के भीतर छिपाकर आयात किया जा रहा था।

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