'हमें मिटा नहीं सकते!' जंतर-मंतर पर गरजे अभिजीत दीपके, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का अल्टीमेटम, वांगचुक का मिला साथ, दिल्ली छावनी में तब्दील!

खबर सार :-
Dharmendra Pradhan resignation protest : नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। जानिए पुलिस की तैयारियों और देशव्यापी आंदोलन की इस बड़ी चेतावनी के बारे में पूरी खबर।
'हमें मिटा नहीं सकते!' जंतर-मंतर पर गरजे अभिजीत दीपके, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का अल्टीमेटम, वांगचुक का मिला साथ, दिल्ली छावनी में तब्दील!
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली का ऐतिहासिक धरना स्थल, जंतर-मंतर, एक बार फिर बड़े सियासी और सामाजिक संग्राम का गवाह बना। देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े नीट (NEET) पेपर लीक मामले ने अब एक आक्रामक राजनीतिक आंदोलन का रूप अख्तियार कर लिया है। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक पैठ बनाने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले हजारों युवाओं और प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को सड़कों पर उतरकर देश के शिक्षा तंत्र में हुई धांधली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

5 बजे का अल्टीमेटम और देशव्यापी आंदोलन की हुंकार

जंतर-मंतर के मंच से बोलते हुए सीजेपी (CJP) के मुख्य सूत्रधार अभिजीत दीपके ने सरकार और प्रशासन को सीधे शब्दों में चुनौती दी। उन्होंने एलान किया कि देश के युवाओं के साथ हुआ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दीपके ने हुंकार भरते हुए कहा, "यदि शनिवार शाम 5 बजे तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं आता है, तो यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले पूरे हफ्ते देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे।" हाल ही में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीजेपी के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट को हटाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए दीपके ने इसे सत्ता की दमनकारी नीति बताया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर पोस्ट डिलीट करके या अकाउंट ब्लॉक करके इस जन-आंदोलन की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने पिछले एक दशक की राजनीति पर तीखा प्रहार करते हुए सवाल उठाया कि जनता को हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों में उलझाकर रखने से क्या युवाओं को रोजगार मिला?

सोनम वांगचुक का साथ और पुलिस की भारी घेराबंदी

इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी बात यह रही कि लद्दाख के मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता और आंदोलनकारी सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल होने जंतर-मंतर पहुंचे। हालांकि, वांगचुक का नजरिया थोड़ा अलग रहा। उन्होंने इस प्रदर्शन को सरकार से एक 'विनम्र अनुरोध' का नाम दिया। उन्होंने कहा कि केवल किसी एक व्यक्ति के पद से हटने मात्र से व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि सरकार को इस पूरी परीक्षा प्रणाली की नाकामी की जिम्मेदारी लेनी चाहिए ताकि भविष्य में छात्रों के साथ ऐसा धोखा दोबारा न हो।

जैसे-जैसे प्रदर्शन आगे बढ़ा, जंतर-मंतर के चारों तरफ का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। चारों तरफ सिर्फ 'शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के नारे गूंज रहे थे। इस भारी विरोध को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।

टकराव की स्थिति: विरोधी गुट भी मैदान में उतरा

जंतर-मंतर पर माहौल उस समय और ज्यादा संवेदनशील हो गया जब सीजेपी के विरोध में एक दूसरा गुट भी वहां पहुंच गया। यह पक्ष सीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा था। विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरे को तोड़कर मुख्य परिसर के भीतर घुसने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।परिसर के बाहर 'जय श्री राम' और 'दिल्ली पुलिस लाठी चलाओ, हम तुम्हारे साथ हैं' के नारे गूंजने लगे। विरोधी गुट का कहना था कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए हंगामा कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को तुरंत हिरासत में ले लिया।

अमेरिका से आते ही मोर्चे पर कूदे दीपके

इस पूरे आंदोलन की रूपरेखा बेहद सुनियोजित थी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार सुबह ही अमेरिका के दौरे से सीधे दिल्ली पहुंचे थे। हवाई अड्डे पर उतरने के बाद वे बिना समय गंवाए सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे, ताकि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की प्रशासनिक अनुमति प्राप्त कर सकें। पिछले महीने ही उन्होंने इंस्टाग्राम और एक्स पर सीजेपी के पेजों की शुरुआत की थी, जो छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुके हैं।

छावनी में तब्दील हुई लुटियंस दिल्ली

खुफिया इनपुट को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। पूरे लुटियंस जोन को 12 अलग-अलग सुरक्षा जोनों में विभाजित किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 2000 से अधिक दिल्ली पुलिस के जवानों और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था। डीसीपी सचिन शर्मा ने उच्च स्तरीय बैठक कर सुरक्षा की समीक्षा की थी और 20 अतिरिक्त कंपनियों को स्टैंडबाय पर रखा था। एहतियात के तौर पर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री के आवासों के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हुआ धरना, पर चेतावनी बरकरार

दोपहर बाद जब प्रदर्शन अपने चरम पर था, तब आयोजकों और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद, सीजेपी नेतृत्व ने कानून-व्यवस्था का सम्मान करते हुए धरने को औपचारिक रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया। भले ही शनिवार का यह धरना समाप्त हो गया हो, लेकिन संगठन द्वारा दी गई 5 बजे की समयसीमा और देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी ने सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

सीजेपी (CJP) द्वारा दिए गए इस अल्टीमेटम के बाद अब देश भर के छात्रों और राजनीतिक गलियारों की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन क्या रुख अख्तियार करेगा, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

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