Cough Syrup Rules: नशे की ओवरडोज और मिलावट के खेल पर सरकार का 'सर्जिकल स्ट्राइक', अब गांवों में आसानी से नहीं मिलेगी कफ सिरप

खबर सार :-
Cough Syrup Rules: केंद्र सरकार ने कफ सिरप (Cough Syrup) की बिक्री को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब छोटे गांवों में भी बिना लाइसेंस और बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप बेचना पूरी तरह गैरकानूनी होगा। जानिए क्या है नया नियम।
Cough Syrup Rules: नशे की ओवरडोज और मिलावट के खेल पर सरकार का 'सर्जिकल स्ट्राइक', अब गांवों में आसानी से नहीं मिलेगी कफ सिरप
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: देश के ग्रामीण इलाकों में कफ सिरप (Cough Syrup) के नाम पर चल रहे नशे के अवैध कारोबार और बिना डॉक्टर की सलाह के धड़ल्ले से खरीदी जा रही दवाइयों के जानलेवा चलन को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त और अभूतपूर्व कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कानून की उस ढाल को ही हमेशा के लिए खत्म कर दिया है, जिसका फायदा उठाकर छोटे गांवों में मौत का यह सामान बिना किसी रोक-टोक के परचून की दुकानों की तरह बिक रहा था। सरकार के इस फैसले के बाद अब कफ सिरप खरीदने के तौर-तरीके पूरी तरह बदलने वाले हैं। अब छोटे से छोटे गांव में भी बिना डॉक्टर की पर्ची के खांसी की दवाई मिलना नामुमकिन हो जाएगा।

Cough Syrup Rules : कानून की उस 'लूपहोल' पर प्रहार 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में एक ऐतिहासिक संशोधन करते हुए उस कानूनी रास्ते को बंद कर दिया है, जिसके तहत अब तक 1000 से कम आबादी वाले गांवों को कफ सिरप बेचने के लिए रिटेल लाइसेंस की जरूरत से छूट मिली हुई थी। सरकार ने राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) (GSR 927 E) जारी कर औषधि नियम की अनुसूची ‘क’ की प्रविष्टि संख्या 13 से सीधे 'सिरप' शब्द को ही डिलीट कर दिया है। इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि जो ग्रामीण इलाके अब तक फार्मास्युटिकल कंपनियों और स्थानीय सप्लायर्स के लिए बिना किसी जांच-पड़ताल के कफ सिरप खपाने का सबसे आसान जरिया बने हुए थे, वहां अब कानून का शिकंजा पूरी तरह कस चुका है।

Cough Syrup Rules :  'धीमे जहर' पर लगेगी पूरी तरह लगाम

दरअसल, इस फैसले के पीछे का सबसे बड़ा कड़वा सच यह है कि देश के ग्रामीण अंचलों में कफ सिरप का इस्तेमाल खांसी ठीक करने से ज्यादा नशे की लत को पूरा करने के लिए किया जा रहा था। कई कफ सिरप में कोडीन जैसी नशीली सामग्रियां होती हैं, जिन्हें युवा और बच्चे नशे के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे। चूंकि 1000 से कम आबादी वाले गांवों में बिना लाइसेंस बिक्री की छूट थी, इसलिए वहां बिना किसी रिकॉर्ड के भारी मात्रा में कफ सिरप की खेप उतारी जा रही थी। सरकार के इस कड़े रुख से अब न केवल इस नशीले नेटवर्क की कमर टूटेगी, बल्कि नकली और घटिया क्वालिटी की सिरप से होने वाली बच्चों की मौतों पर भी पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी।

Cough Syrup Rules : मेडिकल स्टोर ही बेच सकेंगे दवाई  

संशोधन लागू होने के बाद अब देश के किसी भी कोने में कफ सिरप की बिक्री और उसका डिस्ट्रीब्यूशन केवल और केवल औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत रजिस्टर्ड और लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों के माध्यम से ही किया जा सकेगा। अगर ग्रामीण इलाकों में कोई भी किराना दुकानदार या बिना लाइसेंस का वेंडर कफ सिरप बेचता हुआ पकड़ा गया, तो उसे सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी उपभोक्ता को कफ सिरप (Cough Syrup) तभी दी जाएगी, जब उसके पास किसी रजिस्टर्ड डॉक्टर का ओरिजिनल और वैध पर्चा (प्रिस्क्रिप्शन) होगा। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी अब इन पर्चियों का रिकॉर्ड मेंटेन करना पड़ सकता है।

Cough Syrup Rules :  दिसंबर 2025 की अधिसूचना प्रभावी

आपको बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बड़े बदलाव की रूपरेखा दिसंबर 2025 में ही तैयार कर ली थी, जब इस अधिसूचना को अधिसूचित किया गया था। अब यह पूरे देश के हर राज्य और हर छोटे-बड़े गांव में पूरी तरह से प्रभावी हो चुका है। सरकार ने दवा बनाने वाली कंपनियों (मैन्युफैक्चरर्स), थोक व्यापारियों (डिस्ट्रीब्यूटर्स) और फुटकर विक्रेताओं (रिटेलर्स) को आखिरी चेतावनी जारी कर दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियामक मानकों का अनुपालन देश के हर नागरिक की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ बिना किसी रियायत के सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कफ सिरप (Cough Syrup) के इस नए कानून से अब ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा और सुरक्षित सुधार देखने को मिलेगा।

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