नई दिल्लीः केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देश में बढ़ते बैंक धोखाधड़ी मामलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई और अहमदाबाद में सात स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई दो अलग-अलग बैंक फ्रॉड मामलों में की गई, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कुल 119.03 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। सीबीआई की यह कार्रवाई 21 मई को की गई, जिसमें दोनों कंपनियों के निदेशकों के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों की तलाशी ली गई।
सीबीआई ने श्री हरि एक्सट्रूजन प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स जय फॉर्मूलेशंस लिमिटेड के खिलाफ दर्ज मामलों में यह कार्रवाई की। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों कंपनियों ने बैंकों से ऋण लेने के बाद वित्तीय अनियमितताएं कीं और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया।
पहले मामले में श्री हरि एक्सट्रूजन प्राइवेट लिमिटेड पर 61.98 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। इस मामले में सीबीआई ने मुंबई स्थित विशेष न्यायाधीश द्वारा जारी तलाशी वारंट के आधार पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि कंपनी ने पंजाब नेशनल बैंक से कैश क्रेडिट और टर्म लोन की सुविधाएं प्राप्त की थीं, लेकिन बाद में ऋण राशि के उपयोग में गंभीर गड़बड़ियां की गईं।
सीबीआई के मुताबिक, आरोपियों ने बैंक के नियमों का उल्लंघन करते हुए असुरक्षित ऋण वितरित किए और सहयोगी कंपनियों के साथ फर्जी लेन-देन किए। इसके अलावा बिक्री से प्राप्त रकम बैंक खातों में जमा नहीं कराई गई और संबंधित पक्षों को गलत तरीके से भुगतान किए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया।
तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं। एजेंसी अब इन दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धनराशि का इस्तेमाल किन-किन उद्देश्यों के लिए किया गया और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे।
दूसरा मामला मेसर्स जय फॉर्मूलेशंस लिमिटेड से जुड़ा है, जिसमें कंपनी पर 57.05 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। इस मामले में अहमदाबाद की अदालत के वारंट के आधार पर छापेमारी की गई। जांच में आरोप है कि कंपनी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से झूठे बही-खातों और गलत वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर फंड आधारित और गैर-फंड आधारित ऋण सुविधाएं प्राप्त कीं।
सीबीआई के अनुसार, ऋण मिलने के बाद कंपनी ने राशि का दुरुपयोग किया और बैंक को गुमराह करने के लिए गलत जानकारियां दीं। जांच एजेंसी अब वित्तीय लेन-देन और बैंक रिकॉर्ड की गहराई से जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में कंपनियों के निदेशकों और अन्य आरोपियों से पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस कथित धोखाधड़ी में अन्य कारोबारी संस्थाएं या व्यक्ति भी शामिल थे। जरूरत पड़ने पर जल्द ही गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बढ़ते बड़े वित्तीय घोटालों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। हाल के महीनों में सीबीआई ने कई बैंक फ्रॉड मामलों में छापेमारी और गिरफ्तारियां की हैं। सरकार और जांच एजेंसियां बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने और सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही हैं।
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