अयोध्या राम मंदिर दान-पात्र चोरी विवाद में SIT जांच की मांग तेज, मामला गरमाया

खबर सार :-
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के राम मंदिर में दान पात्रों से धन चोरी के बयान के बाद से यूपी की सियासत में लगातार हलचल मची हुई है। कई नेताओं ने अखिलेश यादव के बयान पर नाराजगी भी जताई है लेकिन अब स्वयं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सीएम योगी से इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अयोध्या राम मंदिर दान-पात्र चोरी विवाद में SIT जांच की मांग तेज, मामला गरमाया
खबर विस्तार : -

अयोध्याः श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में दान-पात्रों से धनराशि कथित रूप से चोरी होने के आरोपों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़ी कई तरह की चर्चाएं और दावे तेजी से फैल रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। इसी बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है।

सीएम योगी से SIT गठन की अपील

ट्रस्ट के एक प्रवक्ता के अनुसार, कुछ असत्यापित सूचनाएं और अफवाहें सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं, जिनसे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। ट्रस्ट का कहना है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और व्यापक जांच जरूरी है ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और गलत सूचनाओं पर रोक लगाई जा सके। इसी कारण ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से SIT गठन की अपील की है।

दूसरी ओर, इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कथित “चढ़ावा चोरी कांड” को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं और सच्चाई सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि ट्रस्ट की ओर से दिए जा रहे बयानों को लेकर भी स्पष्टता नहीं है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

अखिलेश यादव ने मांगा स्पष्टीकरण

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया में हेराफेरी में संलिप्त लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि बाद में पुलिस की ओर से खंडन जारी किया जाता है। उन्होंने यह दावा किया कि इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव और असहजता की स्थिति दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, इस विवाद ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

सपा प्रमुख ने आगे कहा कि इस प्रकरण को लेकर देश और विदेश में सनातन धर्मावलंबियों के बीच भी आशंकाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो उसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं और किस स्तर पर यह कथित मामला फैला है।

इसी बीच, मामले में एक और मोड़ तब आया जब यहां पहले तैनात रहे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता और पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने भी चढ़ावे में वर्षों से कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद विवाद और अधिक गहरा गया और विभिन्न पक्षों से अलग-अलग दावे सामने आने लगे।

 वरिष्ठ पदाधिकारी ने गड़बड़ी से किया इनकार

ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय ने पहले ही इस तरह की किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि दान-पात्रों और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित व्यवस्था के तहत संचालित होती है। हालांकि, लगातार उठ रहे आरोपों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के कारण मामला शांत होने के बजाय और अधिक चर्चा में आ गया है।

स्थिति यह है कि अयोध्या में संत समाज भी इस मुद्दे को लेकर विभाजित नजर आ रहा है। कुछ संत पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे अफवाह और राजनीतिक प्रेरित विवाद बता रहे हैं। इस बीच विभिन्न स्तरों पर SIT जांच की मांग तेज हो गई है ताकि पूरे मामले की निष्पक्षता से पड़ताल हो सके और स्थिति स्पष्ट हो सके।

फिलहाल प्रशासन और संबंधित पक्षों की ओर से किसी औपचारिक जांच की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सोशल मीडिया, राजनीतिक बयानों और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं के चलते यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

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