Crude Oil की कीमतें, अमेरिका-ईरान वार्ता और आर्थिक आंकड़े तय करेंगे Share Market की अगली चाल

खबर सार :-
आगामी सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए कई महत्वपूर्ण संकेत लेकर आने वाला है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव, अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति और घरेलू आर्थिक आंकड़ों का असर निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई दे सकता है। बीते सप्ताह की मजबूत तेजी के बाद अब बाजार नई दिशा की तलाश में है और आने वाले घटनाक्रम निवेशकों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
Crude Oil की कीमतें, अमेरिका-ईरान वार्ता और आर्थिक आंकड़े तय करेंगे Share Market की अगली चाल
खबर विस्तार : -

Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। वैश्विक और घरेलू दोनों मोर्चों पर कई ऐसे कारक सामने हैं जो बाजार की दिशा और निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति प्रक्रिया से जुड़े घटनाक्रम तथा देश के प्रमुख आर्थिक आंकड़ों की घोषणा बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अगले सप्ताह वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर पैनी नजर बनाए रखेंगे। खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में संभावित अस्थिरता निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बने हुए हैं।

कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली और यह करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। हालांकि, मध्य-पूर्व में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल द्वारा लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखने के कारण ईरान ने एक बार फिर हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ेगा।

अमेरिका-ईरान वार्ता से बनेगा निवेशकों का मूड

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति प्रक्रिया पर आने वाला हर अपडेट निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेगा। यदि दोनों देशों के बीच सकारात्मक प्रगति होती है तो वैश्विक बाजारों में स्थिरता बढ़ सकती है। वहीं किसी भी प्रकार की नकारात्मक खबर या तनाव बढ़ने की स्थिति में जोखिम लेने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। विदेशी निवेशक भी इन घटनाक्रमों पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों का असर उभरते बाजारों में निवेश के प्रवाह पर पड़ता है।

घरेलू आर्थिक आंकड़े देंगे बाजार को नई दिशा

अगले सप्ताह कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति का संकेत देंगे। 22 जून को वाणिज्य मंत्रालय इन्फ्रास्ट्रक्चर आउटपुट डेटा जारी करेगा। यह आंकड़ा देश के आठ प्रमुख कोर सेक्टरों की गतिविधियों को दर्शाता है और औद्योगिक विकास का शुरुआती संकेत माना जाता है। इसके बाद 23 जून को पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) के आंकड़े सामने आएंगे। यह डेटा विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का आकलन करता है। मजबूत पीएमआई आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देंगे। 26 जून को विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) का डेटा जारी होगा। यह आंकड़ा देश की बाहरी वित्तीय मजबूती को दर्शाता है और रुपये की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

बीते सप्ताह बाजार ने दिखाया दमदार प्रदर्शन

भारतीय शेयर बाजार ने पिछले सप्ताह निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 1,274.95 अंक यानी 1.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,802.90 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 390.20 अंक या 1.65 प्रतिशत चढ़कर 24,013.10 के स्तर पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62,517.30 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3.23 प्रतिशत उछलकर 18,784.45 के स्तर पर पहुंच गया।

डिफेंस, रियल्टी और कंज्यूमर सेक्टर रहे चमकदार

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी इंडिया डिफेंस में 6.58 प्रतिशत की सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 6.44 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 5.50 प्रतिशत, निफ्टी कंजम्प्शन 3.50 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 3.32 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 2.98 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई 2.84 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ सप्ताह का एकमात्र कमजोर सेक्टर साबित हुआ।

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