कमजोर वैश्विक संकेतों से धड़ाम हुआ बाजार, सेंसेक्स 75 हजार के नीचे फिसला

खबर सार :-
कमजोर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और एशियाई बाजारों में गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया। सेंसेक्स 75 हजार के नीचे पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि फार्मा और आईटी शेयरों ने कुछ राहत दी, लेकिन व्यापक बाजार में बिकवाली का माहौल निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाला रहा।

कमजोर वैश्विक संकेतों से धड़ाम हुआ बाजार, सेंसेक्स 75 हजार के नीचे फिसला
खबर विस्तार : -

Share Market Crash: वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत लाल निशान में हुई और शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स 75 हजार के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। निवेशकों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला, जबकि बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक दबाव बना रहा।

शेयर बाजार में आज सुबह करीब 9:24 बजे बीएसई सेंसेक्स 541 अंक यानी 0.72 प्रतिशत टूटकर 74,726 पर कारोबार करता नजर आया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 155 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,462 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है।

रियल्टी और बैंकिंग शेयरों ने बढ़ाया दबाव

बुधवार के शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर में देखने को मिला। निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स प्रमुख लूजर्स रहे। इसके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी कमोडिटीज इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है। अमेरिकी बाजारों में कमजोरी और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

फार्मा और आईटी सेक्टर ने दी थोड़ी राहत

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान सुबह जहां अधिकांश सेक्टर दबाव में दिखाई दिए, वहीं फार्मा और आईटी शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी आईटी इंडेक्स हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, टीसीएस, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों ने बढ़त दर्ज की। इन शेयरों में खरीदारी के चलते बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला, लेकिन व्यापक बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक लाल निशान से बाहर नहीं निकल सके।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली

बाजार में गिरावट केवल लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने बिकवाली की। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 285 अंक यानी 0.47 प्रतिशत टूटकर 60,736 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 126 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,738 पर कारोबार करता दिखा। विश्लेषकों का कहना है कि व्यापक बाजार में कमजोरी यह संकेत देती है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

एशियाई और अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का असर

अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में भी दबाव का माहौल बना रहा। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल और जकार्ता के बाजार लाल निशान में कारोबार करते दिखे। इसके अलावा अमेरिकी शेयर बाजार भी मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। अमेरिकी बाजारों में कमजोरी का सीधा असर एशियाई बाजारों पर पड़ा, जिसका प्रभाव भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली। डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.58 प्रतिशत गिरकर 103 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 0.63 प्रतिशत टूटकर 110 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जाता है, लेकिन फिलहाल बाजार पर इसका असर सीमित दिखाई दे रहा है।

FII की बिकवाली बनी चिंता का कारण

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मंगलवार के कारोबारी सत्र में एफआईआई ने 2,457.49 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 3,801.68 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक बाजारों में स्थिरता नहीं आती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम नहीं होती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

अन्य प्रमुख खबरें